जीवन के हर पहलू पर सकारात्मक असर डालते हैं रंग: वनमाला
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*विरासत में मिली पेंटिंग की कला को चौथी पीढ़ी तक पहुंचाया*
*महाराष्ट्र मंडल की 91 वर्षीय आजीवन सभासद की सक्रियता प्रेरक*
रायपुर। महाराष्ट्र मंडल की वरिष्ठ आजीवन सभासद बूढ़ापारा निवासी वनमाला गोविलकर का रंगों के प्रति प्रेम युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणास्पद है। 91 वर्षीय वनमाला कहती हैं कि रंग जीवन के हर पहलू पर सकारात्मक असर डालते हैं। ऐसे में इन रंगों को देखना और इसका पेटिंग जैसी बहुआयामी कला में इस्तेमाल करना लाभकारी होता है। यही वजह है कि वे अपनी चौथी पीढ़ी को रंगों की कला धरोहर सौंप चुकी हैं।
वनमाला ने यह सिद्ध किया कि कला को निखारने और सतत् अभ्यास करने की कोई उम्र नहीं होती है। कोलकाता में 13 जनवरी 1934 में जन्मी वनमाला को पेटिंग की कला विरासत में मिली। इसे उन्होंने उम्र के इस पड़ाव में भी न केवल सहेजकर रखा है, बल्कि अपनी चौथी पीढ़ी तक पहुंचाया भी है।
उन्होंने कहा कि रंगों की ऊर्जा से तनाव व चिंता में कमी, बेहतर नींद, ऊर्जा में वृद्धि, मूड में सुधार और भावनात्मक संतुलन का फायदा मिलता है। वनमाला ने अनुभव के आधार पर बताया कि नीले, हरे रंग जैसे शांत रंग मन को शांति प्रदान करते हैं। इससे तनाव और चिंता कम होती है। लाल, पीले जैसे जीवंत रंग शरीर में ऊर्जा बढ़ाते हैं और काम करने की प्रेरणा देते हैं। बैंगनी, नारंगी जैसे रंग प्रेरणा और रचनात्मकता को बढ़ावा देते हैं। इससे व्यक्ति मानसिक रूप से अधिक सक्रिय महसूस करता है। इसी कारण एक अच्छे कलाकार में आपको धैर्य नजर आएगा।
पति के निधन के बाद उन्होंने अपनी बेटियों को आत्मनिर्भर बनाया और 80 साल की उम्र तक स्वयं के कपड़े भी सीले। आज 91 वर्ष की आयु में भी अपनी शारीरिक अक्षमता को वनमाला ने अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया और पेटिंग के साथ- साथ सुडोकू, पहेलियां सुलझाने जैसी मनोरंजक गतिविधियों में वे अपना समय व्यतीत करती हैं।
