मां दुर्गा स्व-सहायता समूह की महिलाएं बांस और ताड़ के पत्तों से देशी राखियां बना रही

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बीजापुर। जिला मुख्यालय से लगभग 50 किमी दूर भैरमगढ़ ब्लाक मुख्यालय में शिविर में रह रही कुछ महिलाएं इस समय बांस और ताड़ के पत्तों से देशी राखियां बना रही हैं, इसकी मांग प्रति वर्ष बढ़ती ही जा रही है । मां दुर्गा स्व-सहायता समूह अध्यक्ष फगनी कोवासी ने बताया कि इस समय बांस, ताड़ व छिंद पत्ते से देशी राखियों का निर्माण समूह की 6 महिलाओं के द्वारा किया जा रहा है । उन्होने बताय कि इस काम में अब समूह की महिलाओं की रूचि बढ़ गई है, शुरूआती दौर में राखियों की बिक्री कम होने के बाद इन्होंने हार नहीं मानी और अब मांग बढऩे से इस काम को बड़े पैमाने करते हुए देशी राखी बना रही है।
स्व-सहायता समूह में काम करने वाली महिलाओं में नक्सल प्रभावित ग्राम पंचायत ईतामपारा की रहने वाले मंगलदई ने बताया कि कुछ सालों पहले उसके जेठ स्व. चैतू राम यादव (बड़े भाई) को नक्सलियों पुलिस का मुखबिर बताते हुए हत्या उसके सामने ही कर दी थी। इस हादसे को लेकर वह कई दिनों तक सदमें थी । जेठ की हत्या के बाद उसके परिवार के अन्य सदस्यों को नक्सली नहीं मार दे, इसलिए उसके परिवार के लोग ईतामपरा को छोड़कर भैरमगढ़ में एक शिविर में जीवन यापन कर रहे हैं । मंगलदई ने बताया कि यहां पर उसने कई महिलाओं को राखी बनाते देखा और वह इस काम से जुट गई । उसने बताया वह इस समय दुर्गा नाम से संचालित महिला स्व-सहायत समूह से जुड़ी है, और पिछले कई सालों से वह राखियों का निर्माण में लगी है, भाइयों के लिए वे देशी राखियां बना रही हैं।
विकास खंड परियोजना प्रबंधक रोहित सोरी ने बताया कि वे पिछले तीन साल से प्रति वर्ष 50-60 हजार रुपए की राखियां बेच रही है। इस साल डिमांड अधिक आने से बिक्री ज्यादा होने की संभावना है। राखी की खरीदी अधिकारी कर्मचारी भी करेंगे।