May 25, 2026

बस्तर में मौसम की बेरुखी ने तेंदूपत्ता संग्रहण हुआ प्रभावित

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जगदलपुर। बस्तर अंचल में इन दिनों मौसम की बेरुखी ने तेंदूपत्ता संग्रहण पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। मौसम में आए अचानक बदलाव और लगातार हो रही बारिश ने बस्तर में आम, महुआ और इमली के फसल को प्रभावित किया है, वहीं अरबों रुपए के वनोपज तेंदूपत्ता के कारोबार पर भी अनिश्चितता की परछाई डाल दी है। अप्रैल महीने में तेंदूपत्ता संग्रहण की शुरुआत होने वाली है, लेकिन इन दिनों हो रही बारिश, नमी और धूप की कमी ने संग्राहकों, फड़ मुंशियों और वन विभाग की चिंता बढ़ा दी है। तेंदूपत्ता व्यापार से जुड़े लोगों का मानना है कि पत्तों की आकार, चमक और टिकाऊपन ही उसकी गुणवत्ता तय करती हैं। बारिश के कारण पत्तों पर दाग लग सकते हैं, नमी बनी रहने से पत्तों का विकास नहीं हो पाता हैं। यदि मौसम लगातार ऐसा ही बना रहा, तो पत्तों के सिकुडऩे या खराब की आशंका भी बढ़ सकती है। संग्राहकों के सामनें पत्ता तोडऩे के बाद उसे सुखाने की प्रक्रिया भी बारिश के कारण बाधित होती है।
तेंदूपत्ता बस्तर के हजारों ग्रामीण और वनवासी परिवारों के लिए मौसमी आय का सबसे बड़ा सहारा माना जाता है। लगातार बारिश और धूप नहीं निकलने से तेंदूपत्ता की गुणवत्ता बिगडऩे का खतरा बढ़ गया है, जिससे अरबों के वनोपज कारोबार पर असर पड़ सकता है। इस वर्ष बस्तर रेंज को 2 लाख 70 हजार 600 मानक बोरा तेंदूपत्ता खरीदी का लक्ष्य मिला है। विशेषज्ञों का मानना है कि तेंदूपत्ता जैसे संवेदनशील वनोपज के लिए मौसम का संतुलन बेहद जरूरी है। इस समय बस्तर के जंगलों में आसमान की हर करवट पर हजारों परिवारों की उम्मीदें टिकी हुई हैं।
बस्तर के मुख्य वन संरक्षक आलोक तिवारी का कहना है कि तेंदूपत्ता की गुणवत्ता काफी हद तक मौसम और धूप पर निर्भर करती है। तेज धूप में पत्ते जल्दी विकसित होती है। बारिश अथवा बदली से पत्तों का विकास नहीं होता व उनकी ग्रेडिंग और बाजार मूल्य पर सीधा असर पड़ता है। ऐसे में संग्रहण तो हो सकता है, लेकिन गुणवत्ता कमजोर होने पर इसका आर्थिक नुकसान होता है।