आयुष विवि प्रशासन को एबीवीपी ने सौंपा ज्ञापन, कुलपति ने तीन में से एक मांग को माना
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00 दिया 7 दिन की मौहालत, नहीं तो होगा उग्र आंदोलन
रायपुर। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के प्रतिनिधिमंडल द्वारा पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्मारक स्वास्थ्य विज्ञान एवं आयुष विश्वविद्यालय, नया रायपुर में छात्रों से संबंधित गंभीर समस्याओं को लेकर कुलपति को आज ज्ञापन सौंपा गया। कुलपति ने तीन मांगों में से एक को मान लिया है और शेष दो मांगों पर 7 दिन बाद एक विशेष बैठक आयोजित करने का आश्वासन दिया है। परिषद ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि 7 दिनों के भीतर समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो परिषद उग्र आंदोलन करने को विवश होगी।
ज्ञापन में तीन प्रमुख छात्रहित के मुद्दे उठाए गए जिसमें परीक्षा शुल्क को बिना पूर्व सूचना के एकमुश्त दोगुना किया जाना नीति एवं नैतिकता दोनों के विरुद्ध है। इससे छात्रों पर आर्थिक भार बढ़ा है और उनकी पढ़ाई पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। दूसरा – यदि किसी छात्र को पूरक परीक्षा (सप्लीमेंट्री) आती है और वह पुनर्मूल्यांकन हेतु आवेदन करता है, तो उसका परिणाम इतना विलंब से आता है कि वह अगले सेमेस्टर की परीक्षा हेतु समय पर फॉर्म नहीं भर पाता। इससे छात्र मानसिक तनाव व शैक्षणिक असमंजस का शिकार होता है और तीसरा पुनर्मूल्यांकन एवं गणना के लिए पहले चालू वन वे विंडो पैनल सिस्टम को विश्वविद्यालय द्वारा बंद कर देना छात्रहित में नहीं है। परिषद ने इसे पुन: शुरू करने अथवा उत्तरपुस्तिका को चैलेंज करने की वैकल्पिक सुविधा प्रदान करने की मांग की है।
ज्ञापन सौंपे के बाद कुलपति महोदय ने एबीवीपी की तीसरी मांग को स्वीकार करते हुए बताया कि विश्वविद्यालय वर्तमान में समस्त अकादमिक प्रणाली को ऑनलाइन मोड में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया में है। इसी कारणवश परीक्षा शुल्क में वृद्धि हुई है। आने वाले समय में छात्रों को विश्वविद्यालय आने की आवश्यकता नहीं होगी, वे घर बैठे उत्तरपुस्तिका की प्रतिलिपि प्राप्त कर सकेंगे और डिग्री को छोड़कर सभी कार्य ऑनलाइन माध्यम से पूर्ण होंगे। यह प्रक्रिया लगभग एक वर्ष में पूर्ण की जाएगी। शेष दो बिंदुओं पर विस्तृत चर्चा हेतु कुलपति महोदय ने 7 दिन बाद एक विशेष बैठक आयोजित करने का आश्वासन दिया है।
प्रथम राव फूटाने महानगर मंत्री, एबीवीपी रायपुर ने कहा कि छात्रों के साथ आर्थिक और मानसिक अन्याय हो रहा है। परीक्षा शुल्क को अचानक दोगुना करना छात्रविरोधी कदम है। पुनर्मूल्यांकन में अनावश्यक विलंब छात्रों के शैक्षणिक भविष्य को प्रभावित कर रहा है। यदि विश्वविद्यालय प्रशासन उचित निर्णय नहीं लेता, तो विद्यार्थी परिषद बड़े स्तर पर आंदोलन करेगी। विश्वविद्यालय में अधिकतम नर्सिंग के विद्यार्थी है जिसमें से भी ज्यादातर आर्थिक समस्याओं के कारण लोन लेकर पढ़ाई कर रहे है ऐसे में विश्वविद्यालय को परीक्षा शुल्क में वृद्धि के स्थान पर सरकार से अनुदान प्राप्त कर छात्रों को सब्सिडी देनी चाहिए, जिससे छात्रों पर आर्थिक बोझ न बढ़े। परिषद छात्रहित में किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगी।”
