छत्तीसगढ़ में लोक सेवा केन्द्र बने सेवा-सेतु केन्द्र, अब 442 डिजिटल सेवाएं एक ही छत के नीचे
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रायपुर। राज्य शासन ने नागरिकों को डिजिटल सेवाएं देने की व्यवस्था को बड़ा विस्तार देते हुए प्रदेश में संचालित सभी लोक सेवा केन्द्रों को उन्नत कर सेवा-सेतु केन्द्र के रूप में संचालित करने का निर्णय लिया है। इस बदलाव के साथ अब नागरिकों को 73 की जगह 442 प्रकार की डिजिटल नागरिक सेवाएं एकीकृत मंच पर उपलब्ध होंगी।
73 से 442 तक पहुंचा सेवा विस्तार
पहले लोक सेवा केन्द्रों के माध्यम से प्रमाण पत्र, पंजीयन, आवेदन और शासकीय योजनाओं से जुड़ी 73 सेवाएं दी जाती थीं। उन्नयन के बाद सेवा-सेतु केन्द्रों पर यह संख्या बढ़कर 442 हो गई है। इससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के नागरिकों को विभिन्न विभागों की सेवाएं एक ही मंच पर त्वरित और पारदर्शी तरीके से मिल सकेंगी।
पूरे प्रदेश में एक समान पहचान और ब्रांडिंग
राज्य शासन ने निर्देश दिए हैं कि सभी सेवा-सेतु केन्द्रों की पहचान एक समान हो। इसके तहत हर केन्द्र के मुख्य द्वार पर नया बोर्ड और नाम पट्टिका लगाई जाएगी। सभी प्रचार सामग्री, पोर्टल और पावती पर अब लोक सेवा केन्द्र के स्थान पर श्सेवा-सेतु केन्द्रश् शब्द और निर्धारित लोगो का उपयोग अनिवार्य होगा।
सेवा प्रदाताओं को मिला सेवा-सेतु प्रबंधक का पदनाम
पोर्टल संचालन के लिए अधिकृत सेवा प्रदाताओं को अब सेवा-सेतु प्रबंधक कहा जाएगा। इससे नई व्यवस्था को संस्थागत पहचान और स्पष्टता मिलेगी।
15 दिन में मांगी गई कार्यवाही रिपोर्ट
सभी जिलों को निर्देशित किया गया है कि 15 दिवस के भीतर केन्द्रों के परिवर्तित स्वरूप, बोर्ड, नाम पट्टिका और अन्य सुधारों की कार्यवाही पूरी कर फोटोग्राफ सहित रिपोर्ट भेजी जाए। जिला ई-गवर्नेंस सोसायटी को स्थानीय स्तर पर प्रचार-प्रसार और वेबसाइटों पर सूचना प्रसारित करने की जिम्मेदारी दी गई है।
डिजिटल सुशासन को मिलेगा नया बल
राज्य शासन का मानना है कि यह कदम प्रदेश में ई-गवर्नेंस को नई ऊंचाई देगा। सेवा-सेतु केन्द्र न केवल नाम परिवर्तन हैं, बल्कि नागरिक सेवाओं के विस्तार, तकनीकी सशक्तिकरण और सुशासन की नई कार्य संस्कृति की शुरुआत हैं। इससे डिजिटल इंडिया की अवधारणा जमीनी स्तर पर और मजबूत होगी।
