बुख़ारा और समरकंद के विद्यार्थी इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में करेंगे पढ़ाई और अनुसंधान
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*उज्बेक अध्ययन दल ने लिया कृषि विश्वविद्यालय की शैक्षणिक एवं अनुसंधान अधोसंरचनाओं और सुविधाओं का जायजा*
*अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में द्विपक्षीय सहयोग के क्षेत्रों की पहचान की गई*
रायपुर। भारत एवं उजबेकिस्तान के मध्य कृषि शिक्षा, अनुसंधान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आपसी सहयोग की संभावनाएं तलाशने के लिए उज़बेकिस्तान से आए उच्चस्तरीय प्रतिनिधि मंडल ने आज यहां इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में उपलब्ध शिक्षण, अनुसंधान एवं विस्तार अधोसंरचनाओं, सुविधाओं तथा गतिविधियांे का जायजा लिया। इस दौरान अध्ययन दल ने इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर की अनुसंधान प्रयोगशालाओं, कृषि अनुसंधान परियोजनाओं, स्टार्टअप एवं इन्क्यूबेशन सुविधाओं तथा विश्वविद्यालय की विभिन्न शैक्षणिक एवं नवाचार संरचनाओं का अवलोकन भी किया।
इस प्रतिनिधिमंडल में बुखारा स्टेट यूनिवर्सिटी से अंतरराष्ट्रीय सहयोग के उप-कुलपति प्रो. अब्रोर जोरायेव तुरोबोविच तथा समरकंद स्टेट यूनिवर्सिटी आॅफ वेटरनरी मेडिसीन लाइवस्टाॅक एवं बायोटेक्नोलाॅजीस से अनुसंधान एवं नवाचार के उप-कुलपति प्रो. तयलाकोव तोलिब इसाकुलोविच सहित अन्य वरिष्ठ शिक्षाविद् एवं वैज्ञानिक शामिल हैं। इस अवसर पर “भारत एवं उज्बेकिस्तान के मध्य द्विपक्षीय शैक्षणिक, अनुसंधान एवं तकनीकी सहयोग सुदृढ़ीकरण” विषय पर आयोजित एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन भी किया गया।
कृषि महाविद्यालय रायपुर के सेमिनार हाॅल में कुलपति डाॅ. गिरीश चंदेल के मुख्य आतिथ्य में आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के दौरान उजबेकिस्तान के बुखारा एवं समरकंद विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों द्वारा इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर के साथ छात्र एवं संकाय विनिमय के साथ ही अनुसंधान के विभिन्न क्षेत्रों एवं कृषि उद्यमिता विकास के संबंध में सार्थक विचार-विमश किया गया। इस दौरान दोनो देशों के मध्य शैक्षणिक संबंधों को और अधिक सदृढ़ करने के साथ-साथ नवीन अनुसंधान एवं तकनीकी सहयोग के क्षेत्र में मिल-जुल कर कार्य करने पर प्रतिबद्धता व्यक्त की गई। इस अवसर पर इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के निदेशक शिक्षण द्वारा विश्वविद्यालय में उपलब्ध शैक्षणिक अधोसंरचनाओं, शिक्षण सुविधाओं, संचालित पाठ्यक्रमों, संकाय सदस्यों, शैक्षणिक गतिविधियों आदि के संबंध में जानकारी दी गई। इसके साथ ही संचालक अनुसंधान द्वारा विश्वविद्यालय में उपलब्ध अनुसंधान अधोसंरचनाओं, अनुसंधान सुविधाओं, अनुसंधान योजना एवं गतिविधियों के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी गई। औषधीय एवं सुगंधित पौधांे के उत्पादन, कृषि व्यवसाय एवं उद्यमिता, जैव प्रौद्योगिकी, खाद्य प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन आदि विषयों पर भी विचार मंथन किया गया तथा आपसी सहयोग के क्षेत्रों की पहचान की गई। विभिन्न विभागाध्यक्षों द्वारा विभागीय गतिविधियों प्रस्तुत की गई। बुखारा स्टेट यूनिवर्सिटी से अंतरराष्ट्रीय सहयोग के उप-कुलपति प्रो. अब्रोर जोरायेव तुरोबोविच द्वारा उनके विश्वविद्यालय में उपलब्ध शैक्षणिक एवं अनुसंधान अधोसंरचनाओं, सुविधाओं तथा गतिविधियों के बारे में जानकारी दी गई और कृषि विश्वविद्यालय के साथ द्विपक्षीय सहयोग की संभावानाओं को रेखांकित किया गया। समरकंद स्टेट यूनिवर्सिटी आॅफ वेटरनरी मेडिसीन लाइवस्टाॅक एवं बायोटेक्नोलाॅजीस से अनुसंधान एवं नवाचार के उप-कुलपति प्रो. तयलाकोव तोलिब इसाकुलोविच ने उनके विश्वविद्यालय के संबंध में विस्तृत जानकारी दी और द्विपक्षीय सहयोग की रूप-रेखा बताई। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के अंतरराष्ट्रीय प्रकोष्ट प्रभारी डाॅ. हुलास पाठक ने अतिथियों का स्वागत करते हुए संगोष्ठी की रूप-रेखा प्रतिपादित की। कृषि महाविद्यालय रायपुर की अधिष्ठाता डाॅ. आरती गुहे ने कार्यक्रम के अंत में अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
उजबेकिस्तान के बुखारा एवं समरकंद विश्वविद्यालयों से आए अध्ययन दल ने इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय स्थित विभिन्न अधोसंरचनाओं, सुविधाओं, अनुसंधान योजनाओं एवं गतिविधियों का अवलोकन किया। उन्होंने विश्वविद्यालय के अनुसंधान प्रक्षेत्र में लगाई गई औषधीय एवं सगंध फसलों का अवलोकन किया तथा इसमें गहरी रूचि दिखाई। अध्ययन दल द्वारा टिशू कल्चर लैब में केला, गन्ना, बांस आदि फसलों के ऊतक प्रवर्धित पौधों में भी रूचि दर्शायी। उन्होंने कृषि संग्रहालय में प्रदर्शित प्रारूपों का भी अवलोकन किया। अध्ययन दल ने जैव उर्वरक प्रयोगशाला, जैविक नियंत्रण प्रयोगशाला, डाॅ. आर. एल. रिछारिया जैव प्रौद्योगिकी प्रयोगशाला तथा बायोटेक पार्क का भी अवलोकन किया और वहां संचालित गतिविधियों का जायजा लिया।

गौरतलब है कि इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय कुलपति डाॅ. गिरीश चंदेल के नेतृत्व में कृषि विश्वविद्यालय के उच्चस्तरीय शैक्षणिक प्रतिनिधिमंडल ने विगत माह उजबेकिस्तान के तरमेज़, डेनाऊ, ताशकंद, बुखारा एवं समरकंद स्थित प्रमुख विश्वविद्यालयों, कृषि संस्थानों एवं अनुसंधान केंद्रों का दौरा किया था एवं इन सभी संस्थानों के साथ शिक्षण, अनुसंधान, उद्यमिता विकास तथा प्रौद्योगिकी विकास के क्षेत्र में आपसी सहयोग हेतु समझौते किये गए थे। विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं संस्थानों के साथ हस्ताक्षरित अनेक समझौता ज्ञापनों (एमओयू) के माध्यम से छात्र एवं संकाय विनिमय, संयुक्त अनुसंधान सहयोग, क्षमता निर्माण, एग्री-उद्यमिता सहयोग तथा दीर्घकालिक संस्थागत साझेदारी के नए अवसर विकसित हुए। इसी संवाद को बढ़ाने के लिए उज्बेकिस्तान से 8 सदस्यीय उच्चस्तरीय शैक्षणिक प्रतिनिधिमंडल छत्तीसगढ़ पहुंचा है। कल यह दल रायपुर के आस-पास निजी क्षेत्र में स्थापित कृषि उद्यमिता विकास एवं अनुसंधान संस्थानों का दौरा करेगा।
