आचार्य विद्यासागर जी महाराज की जन्म जयंती मनाई गई
1 min read
Share this
रायपुर। शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर अमलतास केसल, कचना स्थित 1008 श्री मुनिसुव्रत नाथ दिगम्बर जैन मंदिर में संत शिरोमणि 108 आचार्य श्री विद्यासागर जी महा मुनिराज की जन्म जयंती बड़े धूमधाम से धार्मिक माहौल में मनाई गई। नित्य अभिषेक, शांति धारा ,पूजा पाठ के पश्चात आचार्य श्री के अवतरण दिवस पर विशेष आचार्य छत्तीसी विधान किया गया जिसमें सभी धर्म प्रेमीयों ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। उपरोक्त जानकारी मन्दिर के अध्यक्ष हिमांशु जैन ने दी।
आचार्य श्री के जन्म जयंती पर प्रकाश डालते हुए भाई सुरेश मोदी ने बताया कि आचार्य श्री के द्वारा जैन धर्म के अलावा स्वालम्बी भारत के निर्माण हेतु हाथकरघा, गौशाला, प्रतिभा स्थली आदि के लिए जनमानस को प्रोत्साहित किया।आज सम्पूर्ण भारत वर्ष में जितनी भी गोशालाएं संचालित हो रही है उनमें से लगभग 70 जैन समाज की भागीदारी से संचालित हो रही है।
आचार्य श्री की प्रेरणा से तिहाड़ जेल,करीब सम्पूर्ण भारत वर्ष के सेंट्रल जेलों व अन्य सरकारी एवं निजी संस्थानों में हाथकरघा से निर्मित वस्त्रों इत्यादि का निर्माण द्रुत गति से चल रहा है। जिससे सभी का जीवकोपार्जन शुद्ध एवं सात्विक विचारधारा से हो रहा है।
स्वालंबन के साथ इंडिया नही भारत की पौराणिक एवं पुरातन महत्व को जीवंत करते हुए. इंडिया नही भारत बोलो को महत्व दिया जिसे हमारे देश के प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने भी ग्रहण कर भारत को एक नई पहचान बंनाने में सार्थक सिद्ध हुए। वर्तमान में सम्पूर्ण भारत के विभिन्न शहरों में आचार्य श्री के प्रोत्साहन से प्रतिभा स्थली का संचालन निर्वाध गति से हो रहा है जिसमे जैन समाज की बच्चियों के अलावा अन्य समाज की बच्चियां शुद्ध एवं सात्विक विचार धारा का पालन करते हुए ब्रम्हचारणी दीदियों के योगदान से अपना शिक्षण सफल एवं सुदृढ़ तरीके से कर रही है। बता दे कि कि आचार्य श्री विद्यासागर जी महा मुनिराज के द्वारा रचित पुस्तिका -मूक माटी – को भारत सरकार ने पाठ्यक्रम में शामिल कर लिया है।
