May 18, 2026

Census 2027: Over 60 Percent of House Listing Work Completed in Chhattisgarh

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00 गौरेला-पेंड्रा-मरवाही ने रचा इतिहास, 100 प्रतिशत लक्ष्य हासिल कर राज्य में बना नंबर-1 जिला
00 मुख्यमंत्री ने मैदानी टीमों को दी बधाई; बड़े शहरों और नगर निगमों के सुस्त प्रदर्शन पर जताई चिंता, गति बढ़ाने के दिए कड़े निर्देश
रायपुर। छत्तीसगढ़ में आगामी राष्ट्रीय जनगणना 2027 को लेकर प्रशासनिक तैयारियां युद्ध स्तर पर चल रही हैं। राज्य के सभी जिलों और नगर निगमों में मकान सूचीकरण ब्लॉकों के गठन और सत्यापन का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। हाल ही में जारी आधिकारिक प्रगति रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में अब तक कुल 60.73 प्रतिशत कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। इस महाअभियान में डिजिटल टेक्नोलॉजी के सटीक समन्वय से कुल 48,742 ब्लॉकों में से 29,602 ब्लॉकों का कार्य पूर्ण हो चुका है।
सटीक जनगणना से ही हर गरीब तक पहुंचेगा सुशासन — साय
राज्य की इस प्रगति पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने संतोष व्यक्त करते हुए गौरेला- पेंड्रा-मरवाही जिला प्रशासन और प्रदेश भर के प्रगणकों को बधाई दी है। उन्होंने कहा, हमारी सरकार सबका साथ, सबका विकास और सुशासन के संकल्प के साथ आगे बढ़ रही है। आगामी जनगणना 2027 के ये आंकड़े भविष्य में छत्तीसगढ़ के विकास, जनकल्याणकारी योजनाओं और नीति निर्धारण की मजबूत बुनियाद बनेंगे। डिजिटल तकनीकों का उपयोग कर समय-सीमा में कार्य पूर्ण करना सराहनीय है। जिन बड़े शहरों या नगर निगमों में गति धीमी है, वहां के अधिकारी मैदानी मॉनिटरिंग बढ़ाएं और जल्द से जल्द इस राष्ट्रीय महत्व के कार्य को गति दें।
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही ने मारी बाजी, कई जिले शत-प्रतिशत के करीब
राज्य स्तर पर जिलों के प्रदर्शन को देखा जाए तो आदिवासी बहुल गौरेला-पेंड्रा- मरवाही जिला सूची में शीर्ष पर है, जिसने अपने सभी 528 मकान सूचीकरण ब्लॉकों का कार्य 100 प्रतिशत पूरा कर लिया है। इसके बाद जशपुर (99.87 प्रतिशत) और मोहला- मानपुर-अंबागढ़ चौकी (99.84 प्रतिशत) जिले भी पूर्णता के बेहद करीब हैं। इसके अलावा बेमेतरा (97.8 प्रतिशत) और मुंगेली (96.52 प्रतिशत) जिलों में भी काम लगभग खत्म होने की कगार पर है।
कलेक्टर की रणनीति आई काम
जीपीएमजिले के इस शानदार प्रदर्शन और शून्य पेंडेंसी के मॉडल पर कलेक्टर डॉ. संतोष कुमार देवांगन ने अपनी टीम की पीठ थपथपाते हुए कहा कि यह सफलता हमारे स्थानीय प्रगणकों, पर्यवेक्षकों और जिला प्रशासन की बेहतरीन टीम भावना का परिणाम है। भौगोलिक रूप से दुर्गम और आदिवासी बहुल क्षेत्र होने के बावजूद हमने माइक्रो-प्लानिंग के तहत काम किया। हर चार्ज नंबर की रोजाना डिजिटल मॉनिटरिंग की गई, जिससे 17 मई की मध्यरात्रि को डेटा पोर्टल पर सिंक होते ही हमने 100 प्रतिशत पूर्णता का लक्ष्य हासिल कर लिया। अब हम अगले चरण के प्रशिक्षण और मैदानी सत्यापन के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
बड़े शहरों और नगर निगमों की रफ्तार सुस्त, रायपुर-भिलाई पिछड़े
एक तरफ जहां ग्रामीण और दूरस्थ जिलों ने बाजी मारी है, वहीं राज्य के बड़े शहरों और नगर निगम क्षेत्रों में काम की रफ्तार चिंताजनक रूप से धीमी दर्ज की गई है। रायगढ़ नगर निगम सूची में सबसे निचले पायदान पर है, जहां महज 4.65 प्रतिशत काम ही पूरा हो सका है। औद्योगिक हब भिलाई नगर में केवल 7.84 प्रतिशत और रिसाली में 8.33 प्रतिशत कार्य ही संपन्न हुआ है। राजधानी रायपुर की बात करें तो यहां कुल 1,964 ब्लॉकों में से केवल 203 ही पूरे हो पाए हैं, जो कि कुल लक्ष्य का मात्र 10.34 प्रतिशत है।
प्रशासनिक मुस्तैदी का असर
राहत की बात यह है कि राज्य के अधिकांश जिलों में एचएलबी शुरू नहीं हुए (कार्य शुरू नहीं हुआ) का आंकड़ा शून्य है। इसका साफ मतलब है कि मैदानी स्तर पर प्रशासनिक अमला पूरी तरह सक्रिय है। कबीरधाम के महज 1 ब्लॉक को छोड़कर हर जगह काम शुरू हो चुका है। वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि बचे हुए प्रगति पर कार्यों को भी जल्द से जल्द पूरा करने के लिए नगर निगम आयुक्तों और जिला कलेक्टर्स को विशेष नोडल अधिकारी तैनात करने के निर्देश दिए गए हैं।