संसार में माया के बंधन से न बंधना ही मोक्ष है – इन्द्रेश महाराज
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0 – भगवान दिखावे की सुंदरता या आडंबर को नहीं देखते
रायपुर। कलयुग में लोग विचारों की सुंदरता को नहीं बल्कि बाहरी सुंदरता को देखते हैं। लेकिन ये जान लें कि भगवान मन, बुद्धि, विचारों की सौंदर्य को देखते हैं, बाह्य रंग-रूप को नहीं। ठाकुर जी हमें देखें ये बुद्धि होनी चाहिए। जो व्यक्ति अपने वास्तविक रुप को छुपाता है और दिखावे का आडंबर करता है। जो वह हैं नहीं, बनकर घूम रहा है। जो भक्ति में-भजन में विच्छेद डालता है,कारण से नहीं अकारण ही विच्छेद डालता है। ऐसे लोगों को ठाकुर जी नहीं देखते, नेत्र बंद कर लेते हैं। सच्चा प्रेम और भक्ति देखना हैं तो गोपियों का देखें जो जिस स्थिति में भी पहुंचती हैं महाभागी हैं।
भागवताचार्य श्री इन्द्रेश जी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण के बाल लीला का वर्णन करते हुए बताया कि जब पूतना जैसी राक्षसी को भी ठाकुर जी सुख दे सकते हैं तो हमें क्यों नहीं? माता यशोदा ने कलयुग के लोगों को संदेश देने के लिए आचार्य दृष्टि रखते हुए बाल कृष्ण को पूतना जैसी राक्षसनी को सौंप देती हैं। कलयुग में आज 90 प्रतिशत लोग इसलिए भजन नहीं करते हैं कि वे ठाकुर जी से मिलने योग्य नहीं हैं। जप नियम व्रत अनुष्ठान करें,कथा सुने लेकिन यह विचार लेकर नहीं। जब पूतना को ठाकुर जी सुख दे सकते हैं तो हमें क्यों नहीं।
संसार की बंधन में किसी भी प्रकार की माया से न बंध पाना ही मोक्ष है। जहां स्वंय को ढाल लेवे, जिसे कोई भी व्यवस्था या परिस्थिति परेशान नहीं करती है वही मोक्ष है। छोटी-छोटी वस्तु पर निर्भर रहने वाले संसार का हर व्यक्ति आज परतंत्र हैं। परतंत्र से मतलब मायावी दुनिया से बंधा हुआ है। जीते जी जो इस बंधन से मुक्त हो जाए वही मोक्ष है। भगवतमार्गीं लोगों को मिलता है मोक्ष। मोक्ष का मार्ग है आत्मज्ञान,इससे भी मोक्ष मिलता है।

गोवर्धन धारण लीला से श्रीकृष्ण जी ने इंद्र के भान का मर्दण किया है। इस कथा का वृतांत भी आज उन्होने सुनाया। ये अभिमान किसी को भी नहीं आना चाहिए। भक्ति की परीक्षा नहीं ले सकते हैं जैसे रायपुर वालों के साथ आज पिछले दो दिनों से हो रहा है। इतनी बारिश इंद्र जी करवा रहे हैं कि सब कुछ ठहर गया है। ऐसी बारिश में शादियां रुक जाती हैं.बड़े आयोजन कार्यक्रम टल जाते हैं,लेकिन ठाकुर जी ने इस पंडाल को भी अपनी उंगली से उठा रखा है तभी तो कथा में बैठे लोगों को बाहर कुछ भी नही दिखाई पड़ रहा है और न ही कथा में आने के लिए कोई बहाना है। वाकई अद्भुत है रायपुर के लोग।
बरसे बदरिया सावन की..मनभावन की..
पिछले ढाई दिनों से हो रही अनवरत वर्षा के बीच भी हजारों की संख्या में कथा श्रवण करने मंडी ग्राउंड देवेन्द्रनगर पहुंचे श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त करते हुए इन्द्रेश जी महाराज ने कहा कि सूर्य के दर्शन नहीं हो रहे हैं लेकिन ठाकुर जी आए हैं श्यामसुंदर बनकर. इस अंखड वर्षा से भले ही सब कामकाज रुक गए हों लेकिन कथा नहीं रूकी इसके लिए रायपुर के भक्तों को क्या न्यौछावर कर दें उनके पास शब्द नहीं हैं। बस ठाकुर जी कृपा बनी रहे। पंडाल गीला हो गया था कुछ जगहों पर पानी भर गया था लेकिन भक्तों का उत्साह है कि उनकी आस्था पर कोई असर नहीं हुआ।
