पुरुष हो या महिला एशियाई क्रिकेट देशों में भारत का कोई सानी नहीं
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आलेख:संजय दुबे वरिष्ठ खेल पत्रकार
एशिया महाद्वीप में क्रिकेट खेलने वाले देशों में ये बात निर्विवाद रूप से तय हो गई है कि चाहे हिंदुस्तान की पुरुष क्रिकेट टीम हो या महिला टीम विजेता ही है।दीगर देश हारने की केवल खानापूर्ति करते है और अंततः विजेता होने का गौरव हिंदुस्तान के हिस्से में आता है। जापान में चल रहे एशियाई खेलो में हिंदुस्तान और श्रीलंका महिला क्रिकेट टीम के बीच खेला गया फाइनल एकतरफा मैच था। ऐसा नहीं है केवल फाइनल मैच का दृश्य ऐसा था, सेमीफाइनल और इसके पहले एशिया कप के मैच में भी यही आलम था। एशिया महाद्वीप में हिंदुस्तान के साथ साथ महिला क्रिकेट में श्रीलंका, पाकिस्तान, बांग्ला देश ही नियमित रूप से क्रिकेट खेलने वाले देश है।बाकी अभी खेलना सीख रहे है।
जीत और हार की तुलना करे तो हिंदुस्तान की महिला क्रिकेट टीम इतनी मजबूत है कि एशिया स्तर पर तीनों देश चुनौती नहीं दे पा रहे है। तीन देशों की टीम एक दो खिलाड़ियों पर आश्रित है अगर वे खेले तो ही थोड़ी चुनौती सामने खड़े होती है। श्रीलंका और पाकिस्तान की टीम तो केवल अपने अपने देश के कप्तान चमारी अट्टापट्टू और पाकिस्तान की टीम कप्तान फातिमा सना के भरोसे ही खेल रही है दूसरी तरफ हिंदुस्तान की टीम है जिसके कप्तान के रन बनाने या न बनाने से कोई फर्क नहीं पड़ता है।हरमनप्रीत कौर की स्थिति भी सूर्य कुमार यादव के समान हो रही है। टीम की जीत में योगदान ओपनर शैफाली वर्मा और स्मृति मंधना के अलावा गेंदबाजों की टीम नंदनी शर्मा, क्रांति गौड, दीप्ति शर्मा, श्री चरनी को जाता है। देखा जाए तो हिंदुस्तानी ओपनर्स ने हर मैच में पावरप्ले में इतनी तेजी से रन बनाए कि बाकी ओवर्स में कम रन बनने के बावजूद विपक्षी टीम के लिए लक्ष्य असंभव होते दिखा। स्मृति मंधना की बैटिंग हमेशा की तरह आकर्षक रही उनको शैफाली वर्मा का साथ बढ़िया मिलता रहा।शैफाली वर्मा ने इस आयोजन में आक्रामक शतक तो लगाया ही एक बॉलर के रूप में भी वे कप्तान हरमनप्रीत कौर की प्रमुख हथियार बन गई है। शैफाली को विश्व कप की टीम में जगह नहीं मिली थी। सेमीफाइनल के पहले मैच में एक खिलाड़ी प्रतीका रावल के घायल होने पर जगह मिली और इस अवसर को शैफाली ने ऐसा भुनाया कि आज उनकी बल्लेबाजी और गेंदबाजी की चर्चा है।
फाइनल में श्रीलंका को 147 रन से हराया। श्रीलंका की टीम ताश के पत्तों की तरह बिखर गई।
चार साल पहले भी हिंदुस्तान की महिला टीम विजेता थी, इस बार रिप्ले हुआ है। हिंदुस्तान महिला क्रिकेट टीम को ये सौभाग्य मिला है कि उन्होंने देश को पहला गोल्ड मेडल दिलाया है।
