संयंत्र के सुरक्षा अभियांत्रिकी विभाग की पहल पर ट्रक संचालकों, सुपरवाइजर एवं ड्राइवरों हेतु सड़क सुरक्षा कार्यशाला आयोजित
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भिलाई। सेल- भिलाई इस्पात संयंत्र के सुरक्षा अभियांत्रिकी विभाग द्वारा एचआरडी केन्द्र के मुख्य सभागार में ट्रक संचालकों, यूनियन प्रतिनिधियों, सुपरवाइजरों एवं ड्राइवरों के लिए सड़क सुरक्षा विषय पर एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य संयंत्र परिसर में भारी वाहनों के सुरक्षित एवं अनुशासित संचालन को बढ़ावा देना तथा सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम के प्रति जागरूकता सुदृढ़ करना था।
कार्यक्रम में मुख्य महाप्रबंधक (सुरक्षा एवं अग्निशमन सेवाएं) श्री देबदत्त सतपथी ने उपस्थित सदस्यों का स्वागत करते हुए सड़क सुरक्षा को सभी पक्षों की साझा जिम्मेदारी बताया। उन्होंने कहा कि संयंत्र परिसर में “शून्य सड़क दुर्घटना” का लक्ष्य तभी प्राप्त किया जा सकता है, जब प्रबंधन, वाहन संचालक, सुपरवाइजर एवं यूनियन प्रतिनिधि सामूहिक रूप से सुरक्षा नियमों के पालन के प्रति प्रतिबद्ध हों। उन्होंने कहा कि सड़क दुर्घटनाएं केवल आर्थिक क्षति ही नहीं पहुंचातीं, बल्कि मानव जीवन एवं कार्य संस्कृति पर भी गंभीर प्रभाव डालती हैं।

कार्यशाला में सेवानिवृत्त अधिकारी श्री जीवनलाल ध्रुव, सहायक महाप्रबंधक (सुरक्षा अभियांत्रिकी) श्री अजय टल्लू तथा मुख्य प्रशिक्षक के रूप में सहायक प्रबंधक (सुरक्षा अभियांत्रिकी) श्री अखिल मिश्रा एवं इंस्ट्रूमेंटेशन विभाग के जूनियर इंजीनियरिंग एसोसिएट श्री अनिल मिश्रा उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम, यातायात नियमों के पालन तथा भारी वाहन संचालन में सहायक (हेल्पर) की भूमिका पर विस्तृत एवं सार्थक चर्चा की गई।
मुख्य प्रशिक्षक श्री अनिल मिश्रा ने अपने तकनीकी प्रस्तुतीकरण में भारी वाहन संचालन के दौरान ब्लाइंड स्पॉट, ब्लाइंड कॉर्नर, रिवर्सिंग, रात्रिकालीन दृश्यता तथा आपात परिस्थितियों से जुड़े सुरक्षा पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भारी वाहनों के सुरक्षित संचालन में हेल्पर की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि वह रिवर्सिंग के दौरान स्पष्ट संकेत देकर दुर्घटनाओं की संभावना को कम करता है, लोडिंग एवं अनलोडिंग के समय सुरक्षा मानकों की निगरानी करता है तथा सड़क एवं कार्यस्थल पर संभावित खतरों के प्रति चालक को सतर्क करता है।
कार्यक्रम में उपस्थित ट्रक यूनियन के कार्यकारी अध्यक्ष श्री अनिल चौधरी ने सुरक्षा अभियांत्रिकी विभाग की इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु सभी संबंधित पक्षों के बीच समन्वय एवं संवाद आवश्यक है। उन्होंने संयंत्र परिसर में ट्रक संचालन के दौरान आने वाली व्यावहारिक समस्याओं पर भी अपने विचार साझा किए तथा पारस्परिक सहयोग के साथ समाधान की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यशाला के दौरान बोरिया गेट एवं मरोदा गेट सहित विभिन्न प्रवेश द्वारों पर लगने वाले यातायात जाम तथा सड़क सुरक्षा संबंधी चुनौतियों पर भी विचार-विमर्श किया गया। प्रतिभागियों को येलो बॉक्स व्यवस्था एवं यातायात अनुशासन से संबंधित प्रावधानों की जानकारी दी गई। साथ ही, संयंत्र परिसर एवं गेट क्षेत्रों में पूर्व में हुई दुर्घटनाओं का उल्लेख करते हुए सड़क सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर बल दिया
कार्यशाला में यह भी स्पष्ट किया गया कि मोटर वाहन अधिनियम एवं औद्योगिक सुरक्षा नियमों के अनुसार 7500 किलोग्राम से अधिक क्षमता वाले परिवहन वाहनों तथा संयंत्र परिसर में संचालित डंपर, टिपर, हाइड्रा एवं ट्रेलर जैसे भारी वाहनों में हेल्पर की उपस्थिति अनिवार्य है। इस प्रावधान का उल्लंघन सुरक्षा मानकों का उल्लंघन माना जाएगा, जिसके अंतर्गत आवश्यकतानुसार दंडात्मक कार्रवाई एवं वाहन प्रवेश प्रतिबंधित किए जाने का प्रावधान भी लागू होगा। कार्यक्रम का समापन सड़क सुरक्षा के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता एवं सुरक्षित कार्य संस्कृति को और अधिक सुदृढ़ करने के संकल्प के साथ हुआ।
