श्रमिक की बेटी ममता को मिली उड़ान, मुख्यमंत्री नोनी बाबू मेधावी शिक्षा सहायता योजना से नर्सिंग के सपनों को मिला संबल
1 min read
Share this
रायपुर। कहते हैं कि यदि हौसले बुलंद हों और शासन का साथ मिले, तो अभाव भी सफलता की राह नहीं रोक सकते। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है सरगुजा जिले के भिट्ठीकला की रहने वाली ममता ने। ममता, जो कि वर्तमान में बीएससी नर्सिंग तृतीय वर्ष की छात्रा हैं, आज अपनी पढ़ाई को लेकर निश्चिंत हैं और इसका श्रेय वे छत्तीसगढ़ शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं को देती हैं।
संघर्षों के बीच जागी उम्मीद की किरण
ममता के जीवन का सफर आसान नहीं था। पिता स्व. मोटू राम के निधन के बाद घर की पूरी जिम्मेदारी उनकी माता प्यारो बाई के कंधों पर आ गई। माँ ने हार नहीं मानी और एक पंजीकृत श्रमिक के रूप में मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण किया। संसाधनों की कमी के बावजूद प्यारो बाई का सपना अपनी बेटी को उच्च शिक्षा दिलाना था, जिसे छत्तीसगढ़ सरकार के श्रम विभाग ने साकार किया है।
मेधावी शिक्षा सहायता ने आसान हुई राह
ममता ने बताया कि उन्हें श्रम विभाग के माध्यम से नोनी बाबू मेधावी शिक्षा सहायता योजना के तहत 45,000 रुपए की वार्षिक सहायता प्राप्त हुई है। इस राशि ने उनके शिक्षण शुल्क और पढ़ाई से संबंधित अन्य खर्चों के बोझ को कम कर दिया है। उन्होंने बताया कि मेरी मम्मी एक मजदूर हैं, फिर भी उन्होंने हमें कभी पीछे मुडऩे नहीं दिया। श्रम विभाग से मिली इस आर्थिक सहायता की वजह से मैं आज अपनी नर्सिंग की पढ़ाई पूरी कर पा रही हूँ और अपने उज्ज्वल भविष्य का सपना देख पा रही हूँ।
योजना के लिए व्यक्त किया आभार
अपनी सफलता का श्रेय देते हुए ममता ने प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और श्रम विभाग के प्रति अपना हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार की यह योजना आर्थिक रूप से कमजोर मेधावी छात्र-छात्राओं के लिए सशक्त माध्यम बनी है। जिससे पढऩे और आगे बढऩे का सपना साकार हुआ है। मुख्यमंत्री नोनी बाबू मेधावी शिक्षा सहायता योजना के माध्यम से ममता जैसी हजारों बेटियाँ अब न केवल शिक्षित हो रही हैं, बल्कि आत्मनिर्भर बनकर समाज की मुख्यधारा में आगे बढ़ रही हैं।
