पीएलआई योजना से मजबूत हो रहा भारत का खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र

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*विशेष आलेख *

*भारत के खाद्य प्रसंस्करण इकोसिस्टम को नई मजबूती दे रही पीएलआईएसएफपीआई योजना*

भारत का खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र तेजी से देश की अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बनकर उभर रहा है। कृषि उत्पादन, मूल्यवर्धन, रोजगार सृजन और निर्यात वृद्धि को गति देने में इस क्षेत्र की भूमिका लगातार बढ़ रही है। इसी दिशा में केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई *खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना (PLISFPI)* देश के खाद्य मैन्यूफैक्चरिंग इकोसिस्टम को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।

मार्च 2021 में स्वीकृत इस योजना को 2021-22 से 2026-27 तक 10,900 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ लागू किया जा रहा है। योजना का उद्देश्य भारतीय खाद्य प्रसंस्करण कंपनियों को बिक्री वृद्धि, उत्पादन विस्तार और वैश्विक ब्रांडिंग के माध्यम से मजबूत बनाना है। सरकार का लक्ष्य प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादन में वृद्धि के साथ लगभग 2.5 लाख रोजगार सृजित करना था, जिसे योजना ने पहले ही पार कर लिया है।

फरवरी 2026 तक योजना के अंतर्गत 165 आवेदनों को मंजूरी दी जा चुकी है, जो 274 परियोजना स्थलों से संबंधित हैं। लाभार्थियों को अब तक 2,162.55 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि वितरित की जा चुकी है। योजना के माध्यम से लगभग 3.39 लाख प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित हुए हैं, जो निर्धारित लक्ष्य से कहीं अधिक है। इसके साथ ही खाद्य प्रसंस्करण एवं संरक्षण क्षमता में प्रतिवर्ष 34 लाख मीट्रिक टन की वृद्धि दर्ज की गई है।

यह योजना तीन प्रमुख घटकों पर आधारित है। पहले घटक के तहत रेडी-टू-कुक एवं रेडी-टू-ईट उत्पाद, प्रसंस्कृत फल एवं सब्जियां, समुद्री उत्पाद और मोजरेला पनीर जैसे क्षेत्रों को बढ़ावा दिया जा रहा है। दूसरे घटक में एमएसएमई इकाइयों के नवाचार एवं जैविक उत्पादों को प्रोत्साहन दिया जा रहा है, जबकि तीसरे घटक के तहत भारतीय खाद्य ब्रांडों की विदेशों में ब्रांडिंग और मार्केटिंग को सहायता प्रदान की जा रही है।

योजना के अंतर्गत पोषक अनाज (मिलेट) आधारित उत्पादों को भी विशेष प्रोत्साहन दिया गया है। इसके लिए अलग से *पीएलआईएसएमबीपी* घटक तैयार किया गया, जिससे मिलेट आधारित खाद्य उत्पादों के उत्पादन और विपणन को बढ़ावा मिला है।

पीएलआईएसएफपीआई ने निजी निवेश आकर्षित करने में भी उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। लाभार्थियों द्वारा अब तक 9,207 करोड़ रुपये के निवेश की सूचना दी गई है। योजना में एमएसएमई की भागीदारी भी उल्लेखनीय रही है। स्वीकृत 165 आवेदनों में से 69 एमएसएमई श्रेणी से संबंधित हैं, जबकि कई संविदा निर्माण इकाइयां भी इस श्रेणी में शामिल हैं।

निर्यात के मोर्चे पर भी योजना के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। कृषि प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के निर्यात में 2019-20 की तुलना में 2024-25 तक 13.23 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं अप्रैल 2021 से सितंबर 2025 तक योजना से जुड़े लाभार्थियों की संचयी निर्यात बिक्री 89 हजार करोड़ रुपये से अधिक रही।

कुल मिलाकर, पीएलआईएसएफपीआई योजना देश में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को नई दिशा देने के साथ कृषि और उद्योग के बीच मजबूत सेतु का कार्य कर रही है। निवेश, उत्पादन, रोजगार और निर्यात वृद्धि के माध्यम से यह योजना भारत को वैश्विक खाद्य प्रसंस्करण केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो रही है।