तुम मुझे यूं भुला ना पाओगे-चार ओलंपिक, चार पदक

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*99वीं जयंती पर भारत के महान हाकी खिलाड़ी लेस्ली क्लाडियस का नमन*

आलेख:-जसवंत क्लाडियस वरिष्ठ खेल पत्रकार *

ओलंपिक खेलों में स्वतंत्रता के पूर्व भारत के महान खिलाड़ियों में ध्यानचंद, जयपाल सिंह, लाल शाह बुखारी, रूपसिंह शामिल थे। जबकि स्वतंत्र भारत के महान खिलाड़ियों में चरणजीतसिंह, किशनलाल, शंकर लक्ष्मण, पृथ्वीपाल सिंह, लेस्ली क्लॉडियस, अजीत पाल सिंह, उधम सिंह, असलम शेर खां, प्रगट सिंह, बी पी गोविंदा,अशोककुमार,धनराज पिल्ले,दिलीप तिर्की , माइकल किंडो ,पी.आर. श्री जेश,हरमनप्रीत सिंह, मनजीत सिंह प्रमुख हैं।
उपरोक्त खिलाड़ियों में से सिर्फ चार खिलाड़ी ऐसे हैं जो जिन्होंने लगातार चार- चार बार भारत का ओलंपिक खेलों में प्रतिनिधित्व किया है। इनमें लेस्ली क्लाडियस, उधम सिंह,धनराज पिल्लै तथा मनप्रीत सिंह चार हैं। जिन्होंने लगातार चार बार ग्रीष्मकालीन ओलंपिक खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व किया। लेस्ली क्लाडियस 1948,52.56,1960 में टीम में शामिल रहे हैं और तीन स्वर्ण तथा एक रजत पदक जीतने वाली भारतीय टीम के सदस्य रहे । दूसरी तरफ ऊधम सिंह 1952,56,60,1964 में टीम में रहे और तीन स्वर्ण, एक रजत पदक के भागीदार रहे। मनप्रीत सिंह 2012,16,20,2024 में भारतीय टीम में शामिल रहे और 2020 तथा 2024 में दो बार कांस्य पदक जीतने वाली टीम के सदस्य रहे। धनराज पिल्लै का दुर्भाग्य रहा कि वे 1992,96,2000,2004 में भारतीय टीम के सदस्य रहे परंतु कोई पदक नहीं जीत सके.
इस प्रकार लेस्ली क्लॉडियस तीन स्वर्ण, एक रजत के साथ भारतीय टीम के कप्तान भी रहे और भारत की ओर से 100 मैच खेलने वाले पहले हाकी खिलाड़ी थे। अंत: उन्हें स्वतंत्रता के पश्चात भारत का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी माना जा सकता है। लेस्ली क्लॉडियस का जन्म आज ही के दिन 99 वर्ष पूर्व 25 मार्च 1927 को छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में एक एंगलो इंडियन परिवार में हुआ। पहले वे फुटबाल खेलते थे परंतु बाद में हाकी को अपना खेल बना लिया। उनकी आरंभिक शालेय शिक्षा बिलासपुर के मिशन स्कूल में हुई फिर उन्होंने नागपुर बंगाल रेल क्लब की ओर से खेलना आरंभ किया। तब उनको चक्रधरपुर में एक स्थानीय टूर्नामेंट में खेलते हुए भारतीय हाकी टीम के पूर्व खिलाड़ी डिकी कर ने देखा फिर उन्होंने लेस्ली क्लॉडियस को भारतीय टीम में शामिल किए जाने योग्य खिलाड़ी समझा।लेस्ली क्लॉडियस ने इस दौरान 1952 तक ईस्टर्न रेलवे और 1952 से दक्षिण पूर्व रेलवे की ओर से खेला। रेलवे
मुख्यालय कोलकाता होने के कारण उनका बिलासपुर से कोलकाता बार-बार आना जाना लगा रहा. इस दौरान स्वतंत्रता मिलने के बाद1948 में वे भारतीय हाकी टीम के लिए चयनित हुए फिर 1962 तक भारतीय टीम के सदस्य रहे। तब की परिस्थिति में छत्तीसगढ़ जैसे पिछड़े, ग्रामीण क्षेत्र को शासन, प्रशासन, मीडिया, खेल संघ के माध्यम से उन्हें उचित प्रचार प्रसार नहीं मिला। लेकिन अब जबकि छत्तीसगढ़ राज्य अस्तित्व में आ चुका है तब खेल के क्षेत्र में अध्यययन, जांच पड़ताल से यह बात सामने आ रही है कि वे सिर्फ छत्तीसगढ़ ही नहीं बल्कि भारत के महान हाकी खिलाड़ी थे।
टीम में सेंटर हाफ की भूमिका निभाने वाले सरल सीधे ख्याल के लेस्ली बहुतही मेहनती खिलाड़ी थे। सेंटर फारवर्ड की भूमिका बहुत ही महत्वपूर्ण होती थी जिसे पूरी चतुराई और सतर्कता के साथ निभाई जाती है .एक सेंटर हॉफ को अपनी टीम पर विपक्षी हमला करने वाले फारवर्ड पर नजर रखनी होती थी दूसरी तरफ अपनी टीम के फारवर्ड के लिए विपक्षी पर गोल दागने में सफलता मिलने जैसी रणनीति बनानी होती थी। 14 वर्ष तक उन्होंने स्वयं को फिट रखा आज के आधुनिक जिम के बगैर यह उनकी दृढ़ इच्छा शक्ति और मानसिक संतुलन के कारण संभव हुआ। 25 मार्च 2026 को उनके जन्म शताब्दी जयंती शुरू हो रही है। अत: शासन, प्रशासन खेल संघ व मीडिया को उनकी उपलब्धि को प्रचारित प्रसारित करना चाहिए . नवा रायपुर में बनने वाले नए स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स को उनके नाम से समर्पित करना चाहिए.यही उनको छत्तीसगढ़ की जनता की ओर से सबसे बड़ा सम्मान होगा।