बाल विवाह मुक्ति रथ ने छत्तीसगढ़ में 52,295 किलोमीटर की यात्रा तय कर बाल विवाह के खिलाफ लोगों को किया जागरूक
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*‘बाल विवाह मुक्ति रथ’ यात्रा का अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर समापन*
*तीन लाख से अधिक लोगों तक पहुंचाया बाल विवाह के खिलाफ संदेश*
रायपुर। पहियों पर चलकर राज्य के सैकड़ों गांवों में 3,30,360 से अधिक लोगों तक ‘बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़’ का संदेश पहुंचाने वाले अपनी तरह के अनूठे अभियान ‘बाल विवाह मुक्ति रथ’ का अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर समापन हुआ। इस दौरान रथ ने राज्यभर में 52,295 किलोमीटर की यात्रा की। बाल अधिकारों की सुरक्षा व संरक्षण के लिए 250 से भी अधिक नागरिक समाज संगठनों के देश के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन ने बाल विवाह के खात्मे के लिए भारत सरकार के 100 दिवसीय गहन जागरूकता अभियान को मजबूती देने के लिए देशभर में 500 से अधिक ऐसे ही बाल विवाह मुक्ति रथ निकाले थे जिन्होंने देश के कोने-कोने में जाकर समुदायों को बाल विवाह के खिलाफ बने कानूनों के बारे में जागरूक और संवेदनशील बनाया। जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के छह सहयोगी संगठन छत्तीसगढ़ में कार्यरत हैं।
जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के सहयोगी संगठनों के इस अभियान को पूरे राज्य में अभूतपूर्व समर्थन मिला। जाति, धर्म और विचारधारा के बंधन को तोड़ते हुए विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, महिला भुक्तभोगियों, नागरिक समाज संगठनों, पुलिस और धर्मगुरुओं ने एकजुट होकर बाल विवाह के खात्मे के सामूहिक संकल्प को दोहराया। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने खुद पिछले महीने अपने गृह नगर जशपुर से ‘बाल विवाह मुक्ति रथ’ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था।
राज्यभर में एक महीने तक चली इस यात्रा के दौरान बाल विवाह मुक्ति रथ स्कूलों, ग्राम सभाओं, धार्मिक व ऐतिहासिक स्थलों तक पहुंचा व 1,061 कार्यक्रमों के माध्यम से बाल विवाह के खिलाफ संदेश पहुंचाया। इनमें रैलियां, नुक्कड़ नाटक, शपथ समारोह, सांस्कृतिक कार्यक्रम और महिला भुक्तभोगियों की कहानियां शामिल थीं। बाल विवाह मुक्ति रथ इस दौरान 270 से अधिक स्कूलों व कॉलेजों एवं 252 धार्मिक स्थलों तक पहुंचा। अभियान में 45,281 छात्र-छात्राओं और शिक्षकों के अलावा 430 धर्मगुरुओं ने भी भागीदारी की।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2019–21 की अवधि में छत्तीसगढ़ में बाल विवाह की दर 12 प्रतिशत रही, जो राष्ट्रीय औसत 23.3 प्रतिशत से काफी कम है। हालांकि जिलों के बीच इसमें काफी अंतर देखा जाता है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां आदिवासी आबादी अधिक है।
देश के विभिन्न राज्यों में इन रथों को मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, सांसद, जिलाधिकारी और कई राज्यों की विधानसभाओं के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने-अपने राज्यों में बाल विवाह मुक्ति रथ को रवाना किया। राज्यों के 49 मंत्रियों, 82 सांसदों और 154 विधायकों के अलावा 99 जिलाधिकारियों ने विभिन्न जिलों में इस रथ को रवाना किया। एक महीने की इस यात्रा के दौरान देशभर में बाल विवाह मुक्ति रथ ने 28 राज्यों के 66,344 गांवों में पहुंचते हुए 6,79,077 किलोमीटर की यात्रा की और 5,22,68,033 लोगों तक बाल विवाह के खिलाफ संदेश पहुंचाया।
अभियान की सफलता और भारत के बाल विवाह के खिलाफ दृढ़ संकल्प के बाबत जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन की सीनियर एडवाइजर (पॉलिसी) ज्योति माथुर ने कहा, “यह रथ केवल एक प्रतीक नहीं, बल्कि न्याय का वाहक है। इसने जनसमुदाय तक कानून, संरक्षण और जवाबदेही का संदेश पहुंचाया ताकि सरकार की मंशा जमीन पर वास्तविक सुरक्षा में तब्दील हो सके। इस अभियान में शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व और प्रशासनिक अधिकारियों से लेकर शिक्षाविदों और महिला भुक्तभोगियों तक सभी ने उत्साह से भागीदारी की। खास तौर पर जमीनी स्तर के महिला नेतृत्व का अग्रिम मोर्चे से इस संदेश को आगे ले जाते देखना बेहद प्रेरक रहा। ऐसी व्यापक भागीदारी और तात्कालिकता के साथ कार्रवाइयों से हमें विश्वास है कि भारत 2030 की वैश्विक समयसीमा से पहले ही बाल विवाह जैसे अपराध से मुक्त हो जाएगा।”
उन्होंने कोलंबिया विश्वविद्यालय की एक हालिया रिपोर्ट का जिक्र करते हुए कहा, “हमारा हौसला बढ़ाने वाली बात यह है कि दुनिया अब उसे स्वीकार कर रही है जो हम एक दशक से कह रहे हैं कि बाल विवाह दरअसल हमारे बच्चों से बलात्कार है और इसे उसी रूप में देखा और समझा जाना चाहिए।”
जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन ने अपने सहयोगी संगठनों, स्थानीय प्रशासन, कानून लागू करने वाली एजेंसियों, सामुदायिक नेताओं व बाल विवाह में सेवाएं प्रदान करने वाले बैंड बाजा, घोड़ी, सजावट, डीजे व खाना बनाने वाले कैटर्रस के समन्वित प्रयासों से पिछले एक वर्ष में ही छत्तीसगढ़ में 3935 बाल विवाह रुकवाए हैं।
पोस्टरों, प्रभावशाली नारों, लाउडस्पीकर और शपथ हस्ताक्षर बोर्ड से सुसज्जित बाल विवाह मुक्ति रथ को इस तरह तैयार किया गया था कि यह रास्ते में आने वाले दूरदराज और हाशिए पर रहने वाले समुदायों तक पहुंच सके। जहां बेहतर सड़कों वाले इलाकों में चार पहिया वाहनों के माध्यम से अभियान चलाया गया, वहीं सबसे दूरस्थ गांवों तक मोटरसाइकिल और साइकिल कारवां के जरिए संदेश पहुंचाया गया। यात्रा के दौरान बाल विवाह मुक्ति रथ ने पंचायतों, जिला प्रशासन, बाल विवाह निषेध अधिकारियों और अन्य सरकारी अधिकारियों के साथ मिलकर समुदायों तक जागरूकता का संदेश पहुंचाया और बाल विवाह के खिलाफ शपथ दिलाई।
