डोला ग्यारस पर 3 सितंबर को अपने मंदिरों से जलक्रीड़ा करने निकलेंगे भगवान राधा कृष्ण
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*श्री बालाजी मंदिर गंज लाइन से एक साथ निकलेंगे सभी डोले*
*सत्यनारायण मंदिर समिति के आव्हान पर निकलेगी भव्य शोभायात्रा*
राजनांदगांव। संस्कारधानी नगरी में रियासत काल से विभिन्न मंदिरों मे प्राण प्रतिष्ठित लड्डूगोपाल भगवान एवं भगवान राधाकृष्ण भादवा शुक्ल पक्ष एकादशी ( जलझूलनी एकादशी ) के अवसर पर अपने-अपने मंदिरों से निकलकर भव्य डोलो में बैठकर भजन सत्संग करते भक्तो के संग नगर भ्रमण करते हुए रानीसागर पहुंचते हैं। जहां भगवान नौका विहार (जल क्रीड़ा) का आनंद प्राप्त करते हैं। वर्ष 2018 में श्री सत्यनारायण मंदिर समिति के आवाहन पर नगर के विभिन्न मंदिरों से निकलने वाले भगवान के डोले श्री बालाजी मंदिर पुराना गंज मंडी में एकत्रित होकर एक साथ ” संस्कारधानी जल क्रीड़ा महोत्सव ” के बैनर तले शोभायात्रा के रूप में निकल रहे हैं।
संस्कारधानी जल क्रीड़ा महोत्सव समिति के अध्यक्ष अशोक लोहिया द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार इस वर्ष 3 सितंबर को इस भव्य शोभायात्रा में श्री सत्यनारायण मंदिर, श्री राम जानकी बाला बाबा मंदिर, श्रीबलभद्री जमात मंदिर, श्री मोतीनाथ मंदिर, श्री जलाराम राम मंदिर, श्री बलदेव राधा कृष्ण किला मंदिर, स्वामी जुगल किशोर बड़े जमात मंदिर, नोनी बाई मंदिर, श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर सहित अनेक निवासो में विराजित भगवान लड्डूगोपाल एवम भगवान राधाकृष्ण सजधज कर भव्य डोले अथवा रथ में विराजमान होकर एक साथ शोभायात्रा में शामिल होंगे। इस वर्ष भी जल क्रीड़ा महोत्सव को भव्य स्वरूप में धूमधाम से मनाया जाएगा।
जल क्रीड़ा महोत्सव के अंतर्गत सभी मंदिरों के भगवान बुधवार 3 सितंबर को अपने अपने मंदिरों से निकलकर दोपहर 2:00 बजे तक श्री बालाजी मंदिर पुरानी गंज मंडी पहुंचेंगे। यहां पधारे हुए सभी देवताओं का पूजन अर्चन विभिन्न समाजसेवियों एवं श्री बालाजी मंदिर की ओर से किया जावेगा। पूजा आरती पश्चात दोपहर 2:30 बजे भव्य शोभायात्रा प्रारंभ होगी।
*इन मार्गों से निकलेगी डोला शोभायात्रा*
सुसज्जित डोलो में विराजे भगवान की शोभायात्रा पुरानी गंज मंडी बालाजी मंदिर से प्रारंभ होकर तिरंगा चौक, रामाधीन मार्ग, श्री श्याम मंदिर गली से कामठी लाइन, भारत माता चौक, आजाद चौक, मानव मंदिर चौक से फव्वारा चौक होते हुए रानी सागर पहुंचेगी। यहां भव्य सुसज्जित नाव में बैठकर भगवान जल क्रीड़ा करेंगे।
*ये मंदिर होंगे शामिल*
श्री सत्यनारायण मंदिर समिति एवं संस्कारधानी जल क्रीड़ा महोत्सव समिति के अध्यक्ष अशोक लोहिया बताया कि जल क्रीड़ा महोत्सव को धूमधाम से आयोजित करने एक बैठक कल श्री सत्यनारायण धर्मशाला में आयोजित की गई, जिसमे कार्य योजना पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में प्रमुख रूप से पंडित कालू महाराज, आशीष गांधी, पंडित दिलीप वैष्णव, देवकुमार निर्वाणी, पंडित डोमन दास महाराज, पंडित महेंद्र दास, पंडित मनोज शुक्ला, भगवान झा, सचिव सुरेश अग्रवाल, उत्सव प्रभारी लक्ष्मण लोहिया, राजेश शर्मा, श्याम खंडेलवाल, मोतीनाथ मंदिर के अरुण खंडेलवाल, श्री सत्यनारायण मंदिर समिति के राहुल अग्रवाल, ओमप्रकाश शर्मा, सौरभ खंडेलवाल उपस्थित थे।
*जलझूलनी एकादशी का महत्व*
सनातन संस्कृति के पौराणिक ग्रंथों के अनुसार प्रतिवर्ष आषाढ़ शुक्ल एकादशी को भगवान विष्णु क्षीरसागर में योग निद्रा में चले जाते हैं, इस दिवस को देव सोहनी एकादशी कहा जाता है। इसके पश्चात भगवान भादवा शुक्ल एकादशी को छीरसागर में करवट लेते हैं, जिससे सागर का जल हिलता है अतः इस दिवस को जलझूलनी एकादशी कहा जाता है। कार्तिक शुक्ल एकादशी को भगवान योग निद्रा से जागते हैं और इस दिवस को देवउठनी एकादशी कहा जाता है। इस प्रकार भादवा शुक्ल ग्यारस (जलझूलनी एकादशी) को रानीसागर में भगवान नौका में बैठकर विहार करते हैं और अपने भक्तों को सुख, शांति एवम समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करते हैं। नगर में डोला ग्यारस पर रियासत काल से ही प्रमुख मंदिरों से भगवान डोले में बैठकर अपने अपने मंदिरों से निकलकर रानीसागर पहुंचते रहे है। अलग अलग निकलने से दर्शनार्थियों को आनंद की अनुभूति नहीं होती थी, अतः श्री सत्यनारायण मंदिर समिति के द्वारा पहल की गई और सभी मंदिरों के भगवान एक स्थान पुरानी गंज मंडी स्थित श्री बालाजी मंदिर में एकत्रित होकर वहीं से शोभायात्रा के रूप में निकलने लगे है जिसकी पूरे नगर में प्रसंशा हो रही है।
