बिलासपुर रेलवे स्टेशन में की गई है पर्यावरण संरक्षण की दिशा में उत्कृष्ट पहल

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*6 बॉटल क्रशर मशीनों से प्लास्टिक कचरे का हो बेहतरीन निष्पादन *

बिलासपुर ।रेल यात्रा के दौरान बड़ी मात्रा में बोतलबंद पानी का उपयोग किया जाता है, जिसके परिणामस्वरूप खाली प्लास्टिक बोतलें प्लेटफॉर्म, ट्रेन कोच, और सार्वजनिक स्थानों पर फेंक दी जाती थी। जिससे न केवल स्वच्छता प्रभावित हो रही थी बल्कि पर्यावरण को भी गंभीर रूप से नुकसान पहुँचने कि संभावनाए बन रही थी । इसका समाधान एक चुनौती से कम नहीं है।
वरि.मंडल वाणिज्य प्रबंधक श्री अनुराग कुमार सिंह के मार्गदर्शन में मंडल वाणिज्य विभाग द्वारा एक बेहतरीन पहल करते हुये इस चुनौती के सार्थक समाधान एवं “अपशिष्ट मुक्त भारत” अभियान के तहत बिलासपुर रेलवे स्टेशन पर प्लास्टिक कचरा प्रबंधन एवं पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक और सराहनीय कदम उठाया गया है। इसके अंतर्गत बिलासपुर स्टेशन परिसर में 6 स्थानों पर बॉटल क्रशर मशीनें स्थापित की गई हैं, जिनमें से 3 नई अत्याधुनिक मशीनें हैं जो कि कोका कोला कंपनी के सौजन्य से उपलब्ध कराई गई है । नवीनतम तकनीक से युक्त इन मशीनों में यात्रियों को रिवार्ड्स (इनाम) भी दिए जा रहे हैं ।
इस पहल से बिलासपुर स्टेशन पर प्लास्टिक बोतलों का संग्रहण, रिसाइकलिंग, और पुनः उपयोग की प्रक्रिया और अधिक प्रभावी बन गई है। यह न केवल स्टेशन की स्वच्छता बनाए रखने में सहायक है बल्कि “प्लास्टिक मुक्त भारत” और “हरित रेलवे” जैसे राष्ट्रीय अभियानों को भी सशक्त बना रही है ।
रिवार्ड्स प्राप्त करने के लिए यात्रीगण इन तीन आसान स्टेप्स को फॉलो करें:
1. खाली प्लास्टिक बोतल मशीन में डालें।
2. स्क्रीन पर अपना मोबाइल नंबर दर्ज करें।
3. SMS वाउचर प्राप्त कर पास के कोका कोला स्टोर से रिवार्ड पाएं।
बिलासपुर स्टेशन में इन स्थानों पर उपलब्ध है बॉटल क्रशर मशीनें –
• प्लेटफार्म क्रमांक 01 – वातानुकूलित प्रतीक्षालय के सामने
• गेट नं 01 और 04 के पास।
• द्वितीय श्रेणी प्रतीक्षालय ह
• प्लेटफार्म क्रमांक 06 में स्टॉल के पास ।
• प्लेटफार्म क्रमांक 02/03 में सीढ़ी के पास ।
वरि.मंडल वाणिज्य प्रबंधक श्री अनुराग कुमार सिंह ने बताया कि “यह पहल न केवल स्वच्छता को बढ़ावा दे रही बल्कि यात्रियों को प्लास्टिक कचरे के उचित निपटान के लिए प्रोत्साहित भी कर रही है साथ ही इसका अधिकाधिक उपयोग करने वाले यात्रीगण रिवार्ड्स से लाभान्वित भी हो रहे हैं ।