विशेष न्यायाधीश ने कार्यपालक अभियंता व प्रभारी एसडीओ काे 3 वर्ष की सुनाई सजा

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दंतेवाड़ा। जिला एवं सत्र न्यायालय के विशेष न्यायाधीश विजय कुमार होता ने लोक निर्माण विभाग सुकमा में पदस्थ कार्यपालक अभियंता चोवाराम पिस्दा और कोन्टा के उप अभियंता एवं प्रभारी एसडीओ ज्ञानेश कुमार तारम काे सड़क निर्माण में भारी अनियमितता काे लेकर भारतीय दंड साहिता की भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम धारा 13(2), भा.द.सं. की धारा 120, 420, 467, 468, 471 के तहत दोनों आरोपियों चोवाराम पिस्दा और ज्ञानेश कुमार तारम को 3 वर्ष की सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्ष 2010-11 में एलईडब्लयू योजना के तहत चिंतलनार से मरईगुड़ा तक सडक निर्माण का कार्य किया जा रहा था। निर्माण का ठेका नीरज सीमेंट स्ट्रक्चर लिमिटेड मुंबई को दिया गया था। निर्माण कार्य की माप पुस्तिका फर्जी तरीके से करोड़ों रुपए ज्यादा दर्शाए गए थे। कार्य से कहीं अधिक मूल्य का बिल बनवाया गया और करीब 2 करोड़ 84 लाख की राशि का अतिरिक्त आहरण कर ठेकेदार को भुगतान करवा दिया गया था । माप पुस्तिका में कूट रचना और आर्थिक आपराधिक षड्यंत्र के प्रमाण मिलने पर इस मामले में 5 सितंबर 2012 को प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज की गई थी। इसके पश्चात 29 जुलाई 2019 को न्यायालय में अंतिम प्रतिवेदन (चार्जशीट) प्रस्तुत किया गया। मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष द्वारा कुल 19 गवाहों के बयान न्यायालय में हुए। बयान और सक्ष्यों ने अभियुक्तों की संलिप्तता और षड्यंत्र को स्पष्ट कर दिया। दंतेवाड़ा के विशेष न्यायालय ने साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर दोनों अभियुक्तों को दोषी पाकर 3 वर्ष की सजा सुनाई है।