चातुर्मास के प्रथम संडे बच्चों ने स्नात्र पूजा कर जाना तीर्थंकर परमात्मा के जन्मकल्याणक का महात्म्य
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00 24 को पुष्य नक्षत्र विशेष योग के साथ हरेली अमावस्या पर दादागुरुदेव की बड़ी पूजा प्रात: 10 बजे से होगी
रायपुर। खरतरगच्छाधिपति आचार्य श्री जिनमणिप्रभ सूरीश्वर जी की पावन प्रेरणा से चातुर्मास के अवसर पर श्री सीमंधर स्वामी जैन मंदिर में सौ से ज्यादा बच्चों ने संडे की शुरुआत स्नात्र महोत्सव से की।
श्री सीमंधर स्वामी जैन मंदिर व दादाबाड़ी ट्रस्ट के अध्यक्ष संतोष बैद व महासचिव महेन्द्र कोचर ने बताया कि इस भौतिक युग में बच्चों के जीवन को धर्म के मार्ग पर मोडऩा जरूरी है इसी उद्देश्य से गुरुदेव की प्रेरणा से प्रति संडे बच्चों को स्नात्र पूजा , चंदन पूजा व पूजा विधि के सुत्रों का अध्ययन कराया जा रहा है। दर्शनम देव देवस्य , दर्शनम पाप नाशनम , दर्शनम स्वर्ग सोपानाम , दर्शनम मोक्ष साधनम के पवित्र आत्म कल्याणकारी श्लोकों के साथ जब एक साथ सभी बच्चों ने श्री सीमंधर स्वामी जिन मंदिर में प्रभु प्रतिमा के सामने सामूहिक स्वर में पाठ किया तो मंदिर में अलौकिक दृश्य उपस्थित हो गया। ट्रस्टी नीलेश गोलछा ने बताया कि आज 107 बच्चों को तीर्थंकर परमात्मा के जन्मकल्याणक की , तीर्थंकरों के जन्म से तीन ज्ञान व व अतिशय बलों की जानकारी देकर मेरुशिखर पर स्नात्र महोत्सव कराया गया। जिनप्रतिमा के 9 अंगों के पूजन की विधि की जानकारी देकर नवांगी पूजा कराई गई , जैन धर्म में ही भगवान की प्रतिमा में भक्तों द्वारा सीधे पूजन का विधान है। बच्चों को पुरस्कृत किया गया। ट्रस्टी डॉ योगेश बंगानी ने आगे बताया कि चारों दादागुरुदेव के सम्मुख विधिपूर्वक गुरुवंदन की प्रक्रिया सिखाई गई , बच्चों ने दादागुरुदेव का विधिपूर्वक खमासमना देकर वन्दन किया। अंत में दादागुरुदेव इक्तिसा का पाठ किया गया।
