नवा तरिया से बदलेगी घुघरा की तस्वीर, जलसंरक्षण के साथ महिलाओं को मिलेगा आजीविका का सहारा

1 min read
Share this

00 घुघरा में नवीन तालाब निर्माण से ग्रामीणों को रोजगार और सिंचाई की नई सौगात
कोरिया। जिले के वनांचल क्षेत्र अंतर्गत जनपद पंचायत सोनहत की ग्राम पंचायत घुघरा में नवा तरिया आय के जरिया योजना के तहत नवीन तालाब निर्माण कार्य तेजी से प्रगति पर है। ग्राम पंचायत के जनप्रतिनिधियों एवं ग्रामीण श्रमिकों की सक्रिय सहभागिता से यह कार्य मनरेगा अंतर्गत संचालित किया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य जलसंरक्षण के साथ ग्रामीणों को स्थायी आजीविका के अवसर उपलब्ध कराना है। ग्राम पंचायत घुघरा को वित्तीय वर्ष 2026 में इस कार्य हेतु प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। पंचायत द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार आगामी जून माह के मध्य तक तालाब निर्माण कार्य पूर्ण होने की संभावना है।

नवा तरिया से बदलेगी घुघरा की तस्वीर, जलसंरक्षण के साथ महिलाओं को मिलेगा आजीविका का सहारा’
ग्राम पंचायत की सरपंच श्रीमती चंद्रवती गरूण एवं उपसरपंच श्री रामभजन राजवाड़े ने बताया कि वरिष्ठ ग्रामीणों की सलाह और सहमति के बाद उपयुक्त स्थल का चयन किया गया। भूमिपूजन उपरांत बीते सप्ताह से निर्माण कार्य प्रारंभ किया गया है। ग्रामीणों का प्रयास है कि बारिश शुरू होने से पहले तालाब निर्माण पूर्ण हो जाए। मनरेगा अंतर्गत लगभग 20 लाख रुपए की स्वीकृति इस कार्य के लिए प्रदान की गई है, जिसमें 17 लाख 37 हजार रुपए श्रममूलक मद के अंतर्गत व्यय होंगे। ग्राम पंचायत घुघरा को निर्माण एजेंसी बनाया गया है। निर्माणाधीन तालाब की लंबाई एवं चौड़ाई लगभग 70म70 मीटर निर्धारित की गई है। कार्य पूर्ण होने पर इसमें लगभग 6300 घनमीटर से अधिक जलभराव क्षमता विकसित होगी। प्रस्तावित 6 हजार 657 मानव दिवसों के विरुद्ध अब तक लगभग 500 मानव दिवस अकुशल श्रम का सृजन किया जा चुका है।
महिलाओं की आजीविका और मत्स्य उत्पादन को मिलेगा बढ़ावा
यह नवीन तालाब आसपास के 16 परिवारों को प्रत्यक्ष लाभ पहुंचाएगा। इसके माध्यम से लगभग 3 हेक्टेयर क्षेत्र में बहुफसलीय सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होगी। कार्यक्रम अधिकारी श्री प्रतीक ने बताया कि महिलाओं की भागीदारी और आजीविका संवर्धन को ध्यान में रखते हुए कार्य पूर्ण होने के बाद तालाब को स्थानीय महिला समूह को हस्तांतरित किया जाएगा। तालाब में निर्धारित गहराई अनुसार आने वाले वर्षों में लगभग 10 से 15 क्विंटल तक मत्स्य उत्पादन संभव होगा, जिससे ग्रामीण परिवारों की आय में वृद्धि होगी।