राजा दिग्विजय दास की जयंती पर स्मरण का आह्वान
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राजनांदगांव। 25 अप्रैल को राजा दिग्विजय दास की जयंती के अवसर पर शहरवासियों से उनके ऐतिहासिक योगदान को याद करने और नई पीढ़ी तक उनकी विरासत पहुंचाने का आह्वान संस्कारधानी सेवा समिति द्वारा किया गया है। संस्कारधानी राजनांदगांव को विकसित स्वरूप देने में बैरागी राजाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही है, जिन्हें भूल जाना समाज के लिए एक बड़ी चूक मानी जा रही है।
*विकास और शिक्षा को समर्पित योगदान*
राजा दिग्विजय दास ने अपने किले को कॉलेज के लिए प्रदान कर शिक्षा के क्षेत्र में ऐतिहासिक पहल की थी, जो आज भी शहर की पहचान का प्रमुख आधार है। इसी प्रकार, उन्होंने रेलवे के लिए भी नि:शुल्क भूमि उपलब्ध कराकर क्षेत्र के विकास में अहम भूमिका निभाई।
*विद्यालयों में भी हो स्मरण*
यह भी अपेक्षा जताई गई है कि राजा सर्वेश्वर दास हायर सेकेंडरी स्कूल सहित अन्य शैक्षणिक संस्थानों में भी जयंती के अवसर पर उनका स्मरण किया जाए, ताकि विद्यार्थियों को अपने इतिहास और महान व्यक्तित्वों की जानकारी मिल सके।
*सेवा कार्य के रूप में जयंती का आयोजन*
राजा दिग्विजय दास की जयंती पर संस्कारधानी सेवा संस्थान द्वारा 25 अप्रैल को सुबह 10 बजे से महाकाल चौक में शरबत का वितरण किया जाएगा। इस सेवा कार्य के माध्यम से आमजन को गर्मी से राहत देने के साथ-साथ महान शासक के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी।
*क्षेत्र से प्रदेश तक बनाई पहचान*
राजनांदगांव के बैरागी राजाओं ने केवल अपने क्षेत्र के विकास तक ही सीमित न रहकर रायपुर सहित अन्य स्थानों पर भी अपने कार्यों से अलग पहचान बनाई। उनके योगदान ने पूरे क्षेत्र को नई दिशा दी।
*जनप्रतिनिधियों और प्रशासन की जिम्मेदारी*
सामाजिक स्तर पर यह भी मांग उठ रही है कि शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधि ऐसे महान व्यक्तित्वों के सम्मान और स्मरण के लिए विशेष पहल करें। अवसरों पर उनका स्मरण करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
राजनांदगांव अपने बैरागी राजाओं के योगदान को कभी नहीं भूल सकता। उनके द्वारा किए गए कार्य आज भी शहर के विकास की नींव हैं, जिन्हें याद रखना और आगे बढ़ाना हर नागरिक का कर्तव्य है।
