सुकमा पोटाकेबिन स्कूलों के शिक्षकों के लिए एआई पर विशेष कार्यशाला का आयोजित

1 min read

Lavc60.20.101

Share this

सुकमा। नक्सलगढ़ रहे सुकमा जिले का नाम आते ही दिमाग में बारूदी सुरंगें, नक्सली मुठभेड़ और शहादत की खबरें तैर जाती थीं। गांवों के बच्चे स्कूल से ज्यादा डर की कहानियां सुनते बड़े हुए। कई इलाकों में स्कूल भवन क्षतिग्रस्त हुए, तो कहीं पढ़ाई सुरक्षाबलों की निगरानी में चलती रही। ऐसे माहौल में पोटाकेबिन स्कूल बच्चों के लिए सुरक्षित आश्रय बने जहां वे पढ़ सकें, खेल सकें, अब इन्हीं पोटाकेबिन में तकनीक का प्रवेश उस बदलाव की कहानी लिखने जा रहा है, जिसकी कल्पना कुछ वर्ष पहले तक असंभव लगती थी। इस पहल को जमीन पर उतारने के लिए जिला प्रशासन ने लाइवलीहुड कॉलेज सुकमा में पोटाकेबिन स्कूलों के शिक्षकों के लिए विशेष कार्यशाला का आयोजन किया है। इस कार्यशाला में शिक्षकों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के मूल सिद्धांत, आधुनिक टूल्स, डिजिटल कंटेंट निर्माण और बच्चों के लिए सरल प्रोजेक्ट आधारित शिक्षण पद्धति से परिचित कराया जा रहा है। यहां प्रशिक्षण पा रहे शिक्षक अब केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि डिजिटल बोर्ड, स्मार्ट एप्लिकेशन और एआई आधारित लर्निंग मॉडल के माध्यम से पढ़ाई को रोचक बनाएंगे।
कार्यशाला का उद्देश्य पहले शिक्षक सशक्त, फिर छात्र समर्थ, प्रशिक्षण के बाद यही शिक्षक अपने अपने पोटाकेबिन स्कूलों में जाकर बच्चों को एआई की बुनियादी समझ देंगे। बच्चों को सिखाया जाएगा कि एआई क्या है, यह कैसे काम करता है, और रोजमर्रा की जिंदगी में इसका उपयोग कैसे किया जा सकता है। जहां कभी बच्चे जंगल की पगडंडियों से गुजरते हुए स्कूल पहुंचते थे, वहीं अब वे डिजिटल दुनिया की पगडंडियों पर चलना सीखेंगे। यह बदलाव केवल शिक्षा का नहीं, बल्कि सोच का है। सुकमा के कई गांव ऐसे रहे हैं जहां विकास की रफ्तार नक्सली गतिविधियों के कारण थमी रही. इंटरनेट और तकनीकी संसाधनों की कमी ने बच्चों को मुख्यधारा से दूर रखा. लेकिन अब जब पोटाकेबिनों में एआई की पढ़ाई शुरू होगी, तो यह संदेश जाएगा कि शिक्षा सबसे बड़ी ताकत है। जहां कभी हथियारों की भाषा हावी थी, वहां अब कोडिंग और नवाचार की भाषा बोलेगी। नई पीढ़ी की यह पहल यह भी दर्शाती है, कि विकास और शिक्षा ही किसी भी संघर्षग्रस्त क्षेत्र में स्थायी शांति का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं।
एआई प्रशिक्षक शिरीन कुणाल का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल तकनीक सिखाना नहीं, बल्कि आत्मविश्वास जगाना है। सुकमा के बच्चों ने बहुत कुछ देखा और सहा है, लेकिन उनमें सीखने की अद्भुत क्षमता है। एआईकी शिक्षा उन्हें भविष्य के लिए तैयार करेगी। जब ये बच्चे अपने गांव में रहकर डिजिटल प्रोजेक्ट बनाएंगे, तब असली बदलाव दिखाई देगा। हमें विश्वास है कि आने वाले वर्षों में सुकमा के पोटाकेबिन से निकलकर कई बच्चे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान बनाएंगे।