औद्योगिक अपशिष्ट उपयोग पर राष्ट्रीय कार्यशाला, 10 से 14 फरवरी तक
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रायपुर। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी), रायपुर द्वारा सतत एवं संसाधन-कुशल औद्योगिक प्रथाओं को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से “चक्रीय अर्थव्यवस्था के लिए औद्योगिक अपशिष्ट उपयोग: मुद्दे, चुनौतियाँ और अवसर (Industrial Waste Utilization for Circular Economy – IWUCE 2026)” विषय पर एक सप्ताह की उद्योग-प्रायोजित कार्यशाला का आयोजन 10 से 14 फरवरी 2026 तक किया जा रहा है। यह कार्यशाला औद्योगिक अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़ी प्रमुख चुनौतियों पर सार्थक संवाद स्थापित करने तथा चक्रीय अर्थव्यवस्था की ओर संक्रमण के लिए व्यवहारिक और नवाचारी अवसरों की पहचान पर केंद्रित होगी।
कार्यशाला के दौरान उद्योग और शिक्षा जगत के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों द्वारा मुख्य व्याख्यान, तकनीकी सत्र और विचार-विमर्श आयोजित किए जाएंगे। कार्यक्रम में औद्योगिक अपशिष्ट को मूल्यवान संसाधनों में परिवर्तित करने से जुड़े विषयों—अपशिष्ट न्यूनीकरण, संसाधन पुनर्प्राप्ति, स्वच्छ उत्पादन, औद्योगिक सहजीवन, उभरते ऊर्जा समाधान तथा टिकाऊ औद्योगिक विकास—पर विशेष रूप से चर्चा की जाएगी।इसके साथ ही भारत में पर्यावरणीय सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा और सतत औद्योगिक विकास सुनिश्चित करने में परमाणु ऊर्जा की भूमिका तथा परमाणु अपशिष्ट के प्रभावी प्रबंधन पर भी फोकस किया जाएगा।
इस कार्यक्रम को हीरा समूह तथा गोदावरी पावर एंड इस्पात लिमिटेड, रायपुर (छत्तीसगढ़) द्वारा प्रायोजित किया जा रहा है। कार्यशाला परमाणु विज्ञान अनुसंधान बोर्ड (Board of Research in Nuclear Sciences – BRNS) से अनुदान प्राप्त करने हेतु विचाराधीन है एनआईटी रायपुर के निदेशक डॉ. एन. वी. रमना राव कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए अपने विचार साझा करेंगे। कार्यक्रम में भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (Bhabha Atomic Research Centre – BARC), इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (Indira Gandhi Krishi Vishwavidyalaya – IGKV) और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान भिलाई (Indian Institute of Technology Bhilai) सहित अनेक प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञ सहभागिता करेंगे। इसके अतिरिक्त गोदावरी पावर एंड इस्पात लिमिटेड, जायसवाल नेको इंडस्ट्रीज लिमिटेड तथा हाई-टेक पावर एंड स्टील लिमिटेड जैसी प्रमुख औद्योगिक इकाइयों के विशेषज्ञ मुख्य व्याख्यान और तकनीकी सत्र प्रस्तुत करेंगे।
एनआईटी रायपुर के वरिष्ठ संकाय सदस्य डॉ. शोभा लता सिन्हा, प्रोफेसर (हाईएस्ट एकेडमिक ग्रेड), यांत्रिक अभियांत्रिकी विभाग तथा डॉ. समीर बाजपेयी, प्रोफेसर (हाईएस्ट एकेडमिक ग्रेड), सिविल अभियांत्रिकी विभाग सहित अन्य प्राध्यापक अपशिष्ट-से-संसाधन प्रौद्योगिकियों, टिकाऊ निर्माण सामग्री, औद्योगिक उप-उत्पादों के उपयोग, पर्यावरणीय नियमों और उद्योग-अकादमिक सहयोग जैसे विषयों पर अपने विचार रखेंगे। इच्छुक प्रतिभागी राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, रायपुर की आधिकारिक वेबसाइट अथवा उपलब्ध ऑनलाइन पंजीकरण लिंक के माध्यम से पंजीकरण कर सकते हैं। यह कार्यशाला यांत्रिक अभियांत्रिकी विभाग, एनआईटी रायपुर के डॉ. सूरज कुमार मुक्ति, डॉ. सतीश कुमार देवांगन और डॉ. शशिकांत वर्मा द्वारा आयोजित की जा रही है। इस पहल के माध्यम से एनआईटी रायपुर पर्यावरणीय उत्तरदायित्व, नवाचार और सतत विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए हरित भविष्य के लिए शिक्षा जगत और उद्योग के बीच सहयोग को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठा रहा है।
