सूरजपुर के प्रभारी जिला कार्यक्रम प्रबंधक डा प्रिंस जायसवाल की संविदा सेवा समाप्त

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रायपुर। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन संचालक सह आयुक्त ने सूरजपुर के प्रभारी जिला कार्यक्रम प्रबंधक डा. प्रिंस जायसवाल की संविदा सेवा समाप्त कर दिया है। उसने फर्जी कूटरचित प्रमाण पत्र के जरिए नियुक्ति हासिल की थी। उसने साबरमती विश्वविद्यालय के प्रमाण पत्र संलग्न कर आवेदन दिया था।
जारी आदेश के अनुसार के एतद् द्वारा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन अंतर्गत कार्यरत डॉ. प्रिंस जायसवाल (आरएमएनसीएच+ए सलाहकार) वर्तमान प्रभारी जिला कार्यक्रम प्रबंधक, जिला सूरजपुर के विरुद्ध राज्य कार्यालय को शिकायत प्राप्त हुई है, जिसकी जाँच एवं दस्तावेज सम्बन्त्री रिपोर्ट का तथ्यात्मक विवरण निम्नानुसार
1. डॉ. प्रिंस जायसवाल द्वारा जिला कार्यक्रम प्रबंधक पद हेतु पत्र क्रमांक एनएबएम/एबआर/2023/506/2063 दिनांक 04.09.2023 को जारी विज्ञापन में निर्धारित शैक्षणिक योग्यता हेतु साबरमती विश्वविद्यालय (कैलोरक्स टीचर्स यूनिवर्सिटी) मास्टर ऑफ पब्लिक हेल्थ (एमपीएच) की डिग्री संलग्न कर आवेदन किया गया था।
2. पुलिस अधीक्षक, सूरजपुर द्वारा ढों प्रिंस जायसवाल के डिग्री के संबंध में जानकारी प्राप्त किये जाने पर साबरमती विश्वविद्यालय द्वारा अपने पत्र क्रमांक एसयू/लेट/ओसीओई/1072/जुलाई-2024, दिनांक 16-07-2024 में उल्लेख किया गया है कि “निम्नलिखित छात्र के संबंध में विश्वविद्यालय के पास कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है, इसलिए हमें खेद है कि साबरमती द्वारा कोई सत्यापन जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जा सकी।
3. कार्यालय कलेक्टर सूरजपुर से पत्र क्रमांक 596/2025 दिनांक 30.01.2026 से प्राप्त पत्रानुसार साबरमती विश्वविद्यालय से प्राप्त पत्र क्रमांक संदर्भ संख्या एसयू/लेट/ओसीओई/1117/जनवरी-2025 दिनांक 09-01-2025 में स्पष्ट रूप से लेख है कि श्री प्रिंस जैसवाल साबरमती विश्वविद्यालय (पूर्व में कैलोक्र्स टीचर्स यूनिवर्सिटी) के छात्र नहीं हैं। विश्वविद्यालय के रिकॉर्ड के अनुसार दस्तावेज फर्जी और गलत प्रस्तुतीकरण वाले हैं।”
4. बिन्दु क्रमांक 02 एवं 03 के संबंध में डॉ. प्रिंस जायसवाल को इस कार्यालय के पत्र क्रमांक 132/4002 दिनांक 19.02.2025 के माध्यम से 03 दिवस के भीतर जवाब प्रस्तुत करने हेतु कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था, जिसके परिप्रेक्ष्य में डॉ. प्रिंस जायसवाल द्वारा आवेदन दिनांक 20.02.2025 के माध्यम से 30 दिवस का समय मांगा गया था। किन्तु दिनांक 26.05.2025 को डॉ. प्रिंस जायसवाल कार्यालय में उपस्थित होकर अपना जवाब प्रस्तुत किया गया कि इस सम्बन्ध में माननीय न्यायालय, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सूरजपुर के समक्ष परिवाद प्रस्तुत किया गया है, जिसमें माननीय न्यायालय से फर्जी दस्तावेज के संबंध में स्थगन प्राप्त नहीं है। श्री प्रिंस जैसवाल साबरमती विश्वविद्यालय (पूर्व में कैलोक्र्स टीचर्स यूनिवर्सिटी) के छात्र नहीं हैं, विश्वविद्यालय के रिकॉर्ड के अनुसार दस्तावेज फर्जी और गलत हैं के संबंध में पर्याप्त सुनवाई का अवसर प्रदान करने के उपरांत भी डॉ. प्रिंस जायसवाल द्वारा कोई संतोषप्रद साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है। इस प्रकार उनके द्वारा प्रस्तुत जवाब संतोषप्रद एवं समाधानकारक नहीं है।
5. उपरोक्त तथ्यों से यह स्पष्ट है कि डॉ. प्रिंस जायसवाल द्वारा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में सेवारत रहते हुए भी राज्य कार्यालय द्वारा जारी विज्ञापन में फर्जी, कूटरचित दस्तावेजों को प्रस्तुत कर जिला कार्यक्रम प्रबंधक के पद में नियुक्ति पाने का प्रयास किया गया। यह कृत्य मानव संसाधन नीति-2018 का उल्लंघन है. उक्त कृत्य गभीर कदाचरण की श्रेणी में आता है।