उच्च न्यायालय के आदेश के बाद धर्मांतरित मृतक का कफन-दफन अपने जमीन पर किया

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जगदलपुर। परपा थाना क्षेत्र अंर्तगत ग्राम छिंदबहार में विगत 04 दिनों से चल रहे धर्मांतरित मृतक ईश्वर कोर्राम के शव का कफन-दफन को लेकर चल रहे विवाद पर छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के आदेश के बाद रविवार को पुलिस की सुरक्षा में धर्मांतरित मृतक के परिवार ने अपने जमीन पर कफन-दफन किया गया। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने छुट्टी के दिन धर्मांतरित मृतक ईश्वर कोर्राम के पुत्र सार्तिक कोर्राम की याचिका पर तत्काल सुनवाई करते हुए उसके मृत पिता के शव को धार्मिक मान्यता के अनुसार दफनाने की अनुमति देने के साथ ही एसपी बस्तर को इसके लिए सुरक्षा देने के निर्देश दिए हैं, जिससे हिंदू गांव में अंतिम संस्कार के दौरान कोई अप्रिय घटना घटित ना हो सके।
प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम छिंदबहार में गांव वालों के विरोध के बाद धर्मांतरित मृतक ईश्वर कोर्राम के पुत्र सार्तिक कोर्राम ने अपने जमीन पर पिता के शव को दफनाने को लेकर उच्च न्यायालय में याचिका लगाई, उच्च न्यायालय ने याचिका को स्वीकार करते हुए प्रशासन को आदेश दिया कि धर्मांतरित मृतक ईश्वर कोर्राम के शव को उसकी ही जमीन में मिट्टी देने की अनुमति दिया गया। जिसके बाद रविवार को परिजन मेकॉज पहुंचकर शव को गांव ले गए, जहां ईसाई मान्यता के अनुसार कफन-दफन किया गया।
विदित हो कि सार्तिक कोर्राम के पिता ईश्वर कोर्राम को सांस लेने में तकलीफ के चलते 25 अप्रैल को मेडिकल कॉलेज डिमरापाल अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान ईश्वर कोर्राम की मौत हो गई, परिजन जब शव को गांव ले जाकर अंतिम संस्कार करने की बात कही तो गांव वालों ने विरोध शुरू कर दिया, जिसके बाद शव को दुबारा मेकॉज के मर्चुरी में रखवा दिया गया। मृतक ईश्वर कोर्राम के शव को गांव में दफनाने से मना कर दिया गया, जिसके बाद काफी विरोध शुरू हुआ। इस बीच धर्मांतरित मृतक ईश्वर कोर्राम के पुत्र सार्तिक कोर्राम ने छग उच्च न्यायालय में तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया, जस्टिस राकेश मोहन पांडेय की बेंच ने शनिवार शाम 6.30 बजे सुनवाई किया। याचिकाकर्ता के वकील प्रवीन तुलस्यान ने कहा कि अपने पिता के शव को दफनाना भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत याचिकाकर्ता का मौलिक अधिकार है। याचिकाकर्ता और उनका परिवार ईसाई धर्म को मानता है, पिता के शव को ग्राम छिंदबहार में गांव वाले दफनाने से रोक रहे है, जबकि परिवार गांव में अपनी जमीन पर ही शव को दफनाना चाहते हैं। जिसे छग उच्च न्यायालय जस्टिस राकेश मोहन पांडेय ने स्वीकार करते हुए आदेश पारित किया।