महिला आयोग ने 13 वर्ष पुराने मामले का किया समाधान
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*15 लाख रूपये आवेदिका को दिलाने का दिया निर्देश*
*महिला आयोग के नाम से फ्लैक्स टांगने वाली आवेदिका का प्रकरण जांच के लिए पुलिस को सौंपा*
महासमुंद। राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक, सदस्य डॉ. अनिता रावटे एवं जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती उषा पटेल ने बुधवार को जिला पंचायत सभा कक्ष महासमुंद मे महिला उत्पीड़न से संबंधित प्रस्तुत प्रकरणों पर जनसुनवाई की ।जनसुनवाई में कुल 38 प्रकरण सुनवाई हेतु रखे गये थे।छत्तीसगढ़ महिला आयोग की यह 165 वीं जन सुनवाई थी।
आयोग ने दहेज प्रताड़ना के प्रकरण में दोनो पक्षो को सुना और समझाईश देते हुए ‘सखी‘ सेंटर की कांउन्सलर श्रीमती जागेश्वरी सोनवानी ने कांउसिलिंग की जिसके बाद दोनों पक्ष 15 दिन पश्चात एक साथ गांव में रहने को तैयार है। इस स्तर पर इस प्रकरण को मा. सदस्य श्रीमती अनिता रावटे को दिया जा रहा हैं की वे दोनो पक्षों को एक साथ रहने की समझाईश देवें एवं उनके समक्ष सखि सेंटर की कांउन्सलर श्रीमती जागेश्वरी सोनवानी द्वारा इस प्रकरण स्टाम्प में दोनो पक्षों की शर्तों को लिख कर एक वर्ष तक निगरानी करने हेतु निर्देशित किया गया।
एक अन्य मानसिक प्रताड़ना के प्रकरण में दोनो पक्षो को सुना गया आवेदिका का कथन है कि नया मकान बनाने के लिये वर्ष 2010 में अनावेदक पक्ष को आवेदिका को 35 लाख रू देना था। जिसमें से आवेदिका को वर्ष 2010 में 25 लाख रू मिल गया है, 10 लाख रू नहीं मिला है।ं उक्त राशि 10 लाख रू न्यूनतम बैंक ब्याज की राशि के साथ आवेदिका द्वारा मांग की गयी है। अनावेदक 10 लाख रू अवेदिका को देने को तैयार है। दोनो पक्षो को समझााईश देने के पश्चात अनावेदक गण मकान के कब्जे के बदले आवेदिका पक्ष को 15 लाख रू देगें। इस मामले में थाना प्रभारी पिथौरा एवं मा. श्रीमती अनिता रावटे, सदस्य, महिला आयोग के समक्ष में दो पक्ष एक माह के अंदर 15 लाख रूपये देने और लेने की तिथि टी.आई पिथौरा को अवगत कराते हुए पैसे एवं कब्जे का आदान-प्रदान करेंगें एवं आवेदिका की सामग्री को भी दिलवायेगें।
सामाजिक बहिष्कार के मामले में, उभय पक्ष उपस्थित रहे अनावेदक पक्ष के द्वारा बताया गया कि उनके द्वारा कभी भी आवेदिका पक्ष पर कभी भी कोई रोक नहीं लगाई गयी एवं गांव में सभी को उनके साथ सामान्य व्यवहार करने के लिये पूरी छूट है। आवेदिका पक्ष के द्वारा बताया गया की उनके द्वारा 35 हजार रू कुमार साहू को दिया गया था एवं कुमार साहू द्वारा गांव में दिया गया है। आवेदन में कुमार साहू का उल्लेख नहीं किया गया हैं इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता है। अनावेदक गण को निर्देश दिया गया कि आवेदिका पक्ष के साथ भविष्य में कोई भी सामाजिक बहिष्कार नहीं किया जावे यदि ऐसा नहीं किया जाता हैं तो आवेदिका पुनः आयोग में शिकायत कर सकती है।
एक अन्य मानसिक प्रताड़ना के प्रकरण में, उभय पक्ष उपस्थित रहे दोनों की चार बेटियां हैं जिसमें से 2 बेटियां आवेदक एवं 2 बेटियां अवेदिका के पास है। सुलह की कोई संभावना नहीं है। अनावेदक को 90 हजार रू वेतन मिलता है जिसमें से 25-30 हजार रू वह आवेदिका के बैंक खाते में जमा कराता है दोनो के बीच संबध विच्छेद का प्रकरण न्यायालय में चल रहा है। अतः कार्यवाही न्यायालयीन प्रकरण होने के कारण सुनवाई आयोग में नहीं की जा सकती है।
एक अन्य प्रकरण में आवेदिका अनुपस्थित अनावेदक उपस्थित एवं अनावेदक आशीष शर्मा द्वारा आवेदन किया गया की आवेदिका द्वारा घर के समक्ष फ्लैक्स टांगा गया है प्रकरण महिला आयोग में चल रहा है, उधार के लेन देन के लिये वहीं संपर्क करें। यह फोटो और लेख पूर्णतः आपत्तिजनक होने के कारण डीएसपी गरिमा दादर को जांच के लिये भेजा जाता हैं एंव उक्त फ्लेक्स उतरवाकर आवेदिका को 11अप्रैल को अनिवार्यतः आयोग के समक्ष उपस्थिती हेतु निर्देशित किया गया।
